शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

पानीपत-जयपुर-आगरा-मथुरा-वृन्दावन-पानीपत - 4


सुबह हमने वृंदावन के मंदिरों में दर्शन किए I प्रेम मंदिर की भव्यता को देखकर किसी ओर मंदिर को देखने का ख्याल ही नहीं रहा और फिर वहां से सीधे पानीपत के लिए निकल लिए I वापसी में पहली बार हरियाणा की अरावली पर्वत श्रृंखला को देखा काफी शानदार नज़ारा दिखता है । रास्ते में अंकित और रेनू को  हमने भैंसवाल उतारा और उसके बाद पानीपत पहुंच गए  
इस यात्रा में अंकित के फौजी कार्ड की वजह से हमें कहीं भी टोलटैक्स नहीं देना पड़ा
धन्यवाद




























पानीपत-जयपुर-आगरा-मथुरा-वृन्दावन-पानीपत - 3


एक ढाबे पर खाना खाकर आमेर किले पर पहुंचे। उस समय काफी शाम हो चुकी थी  तो  हमने  किले के अंदर जाने की बजाए किले के बाहर जलाशय के किनारे से ही किले को निहारा और फिर सैनिक विश्राम गृह में पहुंचकर विश्राम किया
अगले दिन हमें आगरा घूमकर वृंदावन पहुंचना था इसीलिए सुबह 4 बजे हम नहा-धोकर  निकल लिए ताकि दिन चढ़ने के साथ होने वाली गर्मी से बचा जा सके और साथ ही घूमने के लिया ज्यादा समय मिले और 9:30 बजे तक आगरा पहुँच गए
पहली बार ताज को देखा तो आँखें चुंधिया गयी जितना शानदार नज़ारा ताजमहल के सामने से दिखता है उतना ही खूबसूरत नज़ारा ताजमहल से पीछे यमुना का भी दिखता है बशर्ते कि बारिश का मौसम हो 2 घंटे वहां घूमने के बाद बाहर निकले बाहर निकलते ही गलियों में सामान बेचने वालों ने घेर लिया। एक बन्दा ताज के मॉड्यूल बेच रहा था। एक मॉड्यूल का रेट 150 रुपये बोल रहा था। हमने मोलभाव करके 25 रुपये के हिसाब से 4 पीस ले लिए। आगे जाकर एक दुकान पर भी वैसे ही मॉड्यूल रखे थे मैंने रेट पूछा तो 20 का एक पीस था। हमारी होशयारी धरी रह गयी
आगरा में पेठे की दुकानें ज्यादातर पंछी पेठा के नाम से हैं। ऐसी ही एक दुकान से 500 रुपए के हिसाब से अलग-अलग फ्लेवर में 3 किलो पेठा लिया। कुछ खास नहीं लगा।
आगरा से हम मथुरा पहुंचे। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का रास्ता पूछा तो एक पंडे ने बताया कि ऐसा है बाबू जी अभी तो सब मंदिर बंद हो चुके हैं और शाम 4 बजे खुलेंगे और तब 100 रुपये लगेंगे और आप लोगों को पूरा मथुरा घूमा देंगे लेकिन इसके लिए एक बन्दा आप को अपनी गाड़ी में बिठाना पड़ेगा। हमने बोला कि गाड़ी में जगह नहीं है तो बोला कि मैं बाइक से चलूंगा और 50 रुपये पेट्रोल के भी लूंगा। तब तक आप लोग गोकुल घूम लो। हमने उसको टरकाया और गूगल मैप की सहायता से गोकुल की ओर चल दिए । रास्ते में एक रेहड़ी से हमने कुछ फल लिए साथ ही गोकुल के बारे में कुछ जानकारी लेनी चाही तो फल वाला बोला कि बाबू जी 100 रूपये लगेंगे और आपको पूरा गोकुल, मथुरा घुमा देंगे हमने उसको भी टरकाया और गोकुल वाले रास्ते पे चलते रहे
गोकुल में घुसने से पहले एक मोड़ पर एक बुजुर्ग से रास्ता पूछने के लिए हम ने गाड़ी रोकी हमने सोचा कि बुजुर्ग आदमी है रास्ता बता देगा मैंने कहा ताऊ जी गोकुल के अंदर मंदिर का रास्ता कौन सा है तो बुजुर्ग बोला देखो बेटा ऐसा है 100 लगेंगे और हम तुम्हें पूरा गोकुल घुमा देंगे और इधर हमारा दिमाग घूम गया जिस से भी रास्ता पूछो वही 100 से नीचे बात ही नहीं कर रहा हमने फिर से गूगल का सहारा लिया और आखिरकार मंदिर के पास पहुँच गए
जहां पर हमने गाड़ी पार्क की वहीं पर एक पंडित जी बैठे थे बोले बेटा 30 लूंगा और मंदिर घुमा दूंगा मैंने कहा चलो ठीक है उसने हमें गोकुल के तीन-चार मंदिर में घुमाया
उसके बाद सीधे मथुरा पहुंचे शाम के समय मथुरा में काफी भीड़भाड़ थी मथुरा में मंदिर में दर्शन करने के बाद हम वृंदावन की ओर चल दिए मोबाइल से ही हमने वृंदावन में एक आश्रम टाइप जगह पर 2 कमरे बुक कर लिए  हालांकि पागलबाबा मंदिर के पास पर्यटक सुविधा केंद्र पर भी कमरों का पता किया लेकिन वहां पर अटैच टॉयलेट बाथरूम नहीं था इसीलिए हमने वहां रुकना ठीक नहीं समझा  वृंदावन की गलियों में भटक कर हमने अपना ठिकाना ढूंढ और खा पीकर सो गए
क्रमश:
 आमेर किला