एक ढाबे पर
खाना खाकर आमेर
किले पर पहुंचे। उस
समय काफी शाम
हो चुकी थी
तो हमने किले के अंदर
जाने की बजाए
किले के बाहर
जलाशय के किनारे
से ही किले
को निहारा और
फिर सैनिक विश्राम गृह
में पहुंचकर विश्राम किया
अगले दिन हमें
आगरा घूमकर वृंदावन पहुंचना था
इसीलिए सुबह 4 बजे
हम नहा-धोकर
निकल लिए ताकि
दिन चढ़ने के
साथ होने वाली
गर्मी से बचा
जा सके और
साथ ही घूमने
के लिया ज्यादा
समय मिले और
9:30 बजे
तक आगरा पहुँच
गए ।
पहली बार ताज
को देखा तो
आँखें चुंधिया गयी
। जितना शानदार
नज़ारा ताजमहल के
सामने से दिखता
है उतना ही
खूबसूरत नज़ारा ताजमहल से
पीछे यमुना का
भी दिखता है
बशर्ते कि बारिश
का मौसम हो
। 2 घंटे वहां
घूमने के बाद
बाहर निकले ।
बाहर निकलते ही
गलियों में सामान
बेचने वालों ने
घेर लिया। एक
बन्दा ताज के
मॉड्यूल बेच रहा था।
एक मॉड्यूल का
रेट 150 रुपये बोल
रहा था। हमने
मोलभाव करके 25 रुपये
के हिसाब से
4 पीस ले लिए।
आगे जाकर एक
दुकान पर भी
वैसे ही मॉड्यूल रखे
थे । मैंने
रेट पूछा तो
20 का
एक पीस था।
हमारी होशयारी धरी
रह गयी ।
आगरा में पेठे
की दुकानें ज्यादातर पंछी
पेठा के नाम
से हैं। ऐसी
ही एक दुकान
से 500 रुपए के
हिसाब से अलग-अलग फ्लेवर में
3 किलो पेठा लिया।
कुछ खास नहीं
लगा।
आगरा से हम
मथुरा पहुंचे। मथुरा
में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का
रास्ता पूछा तो
एक पंडे ने
बताया कि ऐसा
है बाबू जी
अभी तो सब
मंदिर बंद हो
चुके हैं और
शाम 4 बजे खुलेंगे और
तब 100 रुपये लगेंगे
और आप लोगों
को पूरा मथुरा
घूमा देंगे लेकिन
इसके लिए एक
बन्दा आप को
अपनी गाड़ी में
बिठाना पड़ेगा। हमने
बोला कि गाड़ी
में जगह नहीं
है तो बोला
कि मैं बाइक
से चलूंगा और
50 रुपये
पेट्रोल के भी लूंगा।
तब तक आप
लोग गोकुल घूम
लो। हमने उसको
टरकाया और गूगल
मैप की सहायता
से गोकुल की
ओर चल दिए ।
रास्ते में एक
रेहड़ी से हमने
कुछ फल लिए
साथ ही गोकुल
के बारे में
कुछ जानकारी लेनी
चाही तो फल
वाला बोला कि
बाबू जी 100 रूपये
लगेंगे और आपको
पूरा गोकुल, मथुरा
घुमा देंगे ।
हमने उसको भी
टरकाया और गोकुल
वाले रास्ते पे
चलते रहे
गोकुल में घुसने
से पहले एक
मोड़ पर एक
बुजुर्ग से रास्ता पूछने
के लिए हम
ने गाड़ी रोकी
हमने सोचा कि
बुजुर्ग आदमी है रास्ता
बता देगा मैंने
कहा ताऊ जी
गोकुल के अंदर
मंदिर का रास्ता
कौन सा है
तो बुजुर्ग बोला
देखो बेटा ऐसा
है 100 लगेंगे और
हम तुम्हें पूरा
गोकुल घुमा देंगे
और इधर हमारा
दिमाग घूम गया
जिस से भी
रास्ता पूछो वही
100 से नीचे बात
ही नहीं कर
रहा हमने फिर
से गूगल का
सहारा लिया और
आखिरकार मंदिर के पास पहुँच
गए
जहां पर हमने
गाड़ी पार्क की
वहीं पर एक
पंडित जी बैठे
थे बोले बेटा
30 लूंगा
और मंदिर घुमा
दूंगा मैंने कहा
चलो ठीक है
उसने हमें गोकुल
के तीन-चार
मंदिर में घुमाया
उसके बाद सीधे
मथुरा पहुंचे शाम
के समय मथुरा
में काफी भीड़भाड़ थी
मथुरा में मंदिर
में दर्शन करने
के बाद हम
वृंदावन की ओर चल
दिए मोबाइल से
ही हमने वृंदावन में
एक आश्रम टाइप
जगह पर 2
कमरे बुक कर
लिए हालांकि पागलबाबा मंदिर के पास पर्यटक सुविधा केंद्र पर भी
कमरों का पता
किया लेकिन वहां
पर अटैच टॉयलेट
बाथरूम नहीं था
इसीलिए हमने वहां
रुकना ठीक नहीं
समझा वृंदावन की गलियों में
भटक कर हमने
अपना ठिकाना ढूंढ
और खा पीकर
सो गए
क्रमश:
आमेर किला