एक बार घरवालों को साथ लेकर माता वैष्णो देवी के दर्शनों का मौका मिला । ट्रेन में लंबी वेटिंग चल रही थी तो मैंने यात्रा की तिथि से 10 दिन पहले दिल्ली से कटरा के लिए चलने वाली आशियाना ट्रेवल बस सर्विस में पानीपत से कटरा के लिए 2 सीटिंग और 2 स्लीपर सीट बुक कर ली । उस समय सीटर का किराया 550 और स्लीपर का 650 रुपए था ।
ये बुकिंग मैंने ऑफिस में कंप्यूटर से की थी । पहले तो हम 6 सदस्य 4 बड़े और 2 बच्चे वैष्णो देवी जाने वाले थे । लेकिन जैसे-जैसे घरवालों से आसपड़ोस वालों और रिश्तेदारों को पता चला तो यात्रा की तिथि तक मैं जब शाम को ऑफिस से घर आता तो किसी ना किसी पड़ोसी के टिकेट के पैसे घरवाले मुझे पकड़ा देते कि इनकी भी सीट बुक करवा दे और जब यात्रा वाले दिन हम घर से पानीपत टोल टैक्स पे बस पकड़ने के लिए पहुंचे तो कुल मिलाकर 17 सदस्य हो चुके थे (मैं, मेरी बीवी और मेरा बेटा, मेरा छोटा भाई, मेरी माँ, मौसी, मामी, चाचा-चाची और उनके 2 बच्चे, मेरा एक दोस्त और उसकी बीवी साथ में उनकी बच्ची, पड़ोस वाली 2 चाची और 1 बुआ) । अगर पहले पता होता कि इतनी सवारी हो जाएंगी तो फिर गाड़ी ही बुक कर लेते । यात्रा वाले दिन मैंने आशियाना ट्रेवल में फोन किया तो उन्होंने बताया कि बस दिल्ली से शाम 5 बजे चलेगी और 9 बजे पानीपत टोल प्लाजा पे पहुंच जाएगी ।
लगभग 8:00 बजे हम सब एक टैम्पो में सवार होकर अपने गांव बिंझौल से पानीपत टोल प्लाजा पे पहुंच चुके थे । वहां से बस वाले को फोन किया तो पता चला कि बस दिल्ली से 7 बजे चली है और 10 बजे तक पानीपत पहुंच जाएगी। गुस्सा तो भोत घणा आया लेकिन अब कर भी क्या सकते थे। टोल प्लाजा पार कर के बैठे गए बस के इंतजार में । 10 की जगह 11 बजे बस आई । तब तक खून भी उबल-उबल के ठंडा हो गया ।
बस कंडक्टर ने तनातनी वाले माहौल को देखते हुए फटाफट सवारियों को एडजस्ट किया । जिन स्लीपर केबिन को हमने बुक किया था उनमें बुर्काधारियों के 2 परिवार अपने 10 बच्चों के साथ बैठे थे । कंडक्टर ने उनको दूसरी सीटों पे एडजस्ट किया ।
रास्ते में 2 जगह रुकने के बाद बस सुबह 7 बजे तक बस जम्मू पहुंच चुकी थी । जम्मू बाईपास पे बस काफी देर तक खड़ी रही तब तक हमने सड़क पे लगी हुई फलों की रेहड़ी से कुछ सेब, केले लेकर हल्का-फुल्का नाश्ता कर लिया । जम्मू में बस से आधी से ज्यादा सवारियां उतर गयी और 8:30 बजे तक हम कटरा पहुंचे।
होटल की कोई प्री-बुकिंग इसीलिए नहीं कि थी क्योंकि ऑनलाइन इतने सदस्यों के लिए महँगे रेट के कमरे मिल रहे थे । कटरा में होटलों की भरमार है तो इतना तो अंदाजा था कि कमरे मिलने में कोई दिक्कत नही होगी ।
बसस्टैंड के पास एक होटल में दो कमरे लिए । रेट दोनों का मिलाकर 3000 रुपये लगा । हालाँकि थोड़ी कोशिश करते तो कुछ सस्ते कमरे मिल सकते थे लेकिन हमारा झुंड छोटे-बड़े, बुजुर्ग-जवान मिलाकर काफी बड़ा था तो सस्ते के चक्कर में ज्यादा भटकने की बजाय वहीं रुक गए । होटल वाले को पहले ही बता दिया था कि छोटे-बड़े मिलाकर 17 सदस्य हैं तो उसी के मुताबिक हमे बड़े कमरे दे दिए जिनमे एक में 3 डबल bed थे एक में 1 डबल bed और एक सिंगल bed था ।
फ्रेश होकर हमने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया । फिर यात्रा पर्ची लेकर चल पड़े माता के दर्शनों के लिए । उस समय मेरे पास एक पोस्टपेड सिम था तो मैंने सभी को छोटी-छोटी पर्चियों पे अपना मोबाइल नंबर लिख कर दे दिया और साथ ही सबको बोल दिया कि छोटे बच्चों को अपनी नज़रों से ओझल ना होने दें । अगर रास्ते में कोई ज्यादा आगे-पीछे हो जाए तो माता के भवन के पास पूछताछ केंद्र पे सबको एकत्रित होना है । हालाँकि कोई नही बिछुड़ा और सब एकसाथ ही चलते रहे । माता के भवन से लगभग 2 किलोमीटर पहले एक जगह काफी लंबी लाइन लगी हुई थी । पता चला कि आगे भवन पे ज्यादा भीड़ है तो यहां थोड़ी देर के लिए रोक-रोक कर आगे जाने दे रहे हैं । इतनी भीड़ देखकर मुझे टेंशन हो गई क्योंकि हमारे साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे और ऊपर से बारिश का मौसम भी हो रहा था ।
क्रमशः
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