ऋषिकेश से बद्रीनाथ
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के बाहर कुछ ऑटो वाले खड़े थे । मैंने एक ऑटो वाले से कहा कि हमने बद्रीनाथ जाना है । ऑटो वाले ने कहा कि उसके लिए तो प्राइवेट बसअड्डे से बस मिलेगी । फिर उसने एक अन्य ऑटो वाले के ऑटो में बिठाया और उसे कहा कि इन्हे प्राइवेट बसअड्डे पे उतार देना । प्राइवेट बसअड्डे पे पहुंचकर एक बस जिसका नंबर आज भी मुझे याद है UK0580 में हमने बद्रीनाथ जाने के लिए पूछताछ की । बस वाले ने बताया कि आज शाम तक जोशीमठ पहुंचेंगे, रात को जोशीमठ में रुकेंगे और अगले दिन सुबह बद्रीनाथ जायेंगे । मैंने कहा कि कोई ऐसी बस नहीं है क्या जो आज ही बद्रीनाथ पहुंचा दे तो बस वाले ने कहा कि आज ही बद्रीनाथ पहुँचने के लिए सुबह 5 बजे वाली बस से जाना था अब तो जितनी भी बसे जाएँगी वो सब शाम तक जोशीमठ ही पहुंचेंगी , मैंने उस बस में बद्रीनाथ तक के 3 टिकट लिए और बस में बैठ गए । मेरे पास कैमरे की 1 ही रील थी तो मैंने बसअड्डे के पास ही एक दूकान से 1 रील और 2 जोड़ी सेल ले लिए । सुबह 9 बजे बस ऋषिकेश से चली । 1 घंटा तो ऋषिकेश के जाम से निकलने में लग गया । ऋषिकेश से आगे ऊँचे-ऊँचे पहाड़ देखकर दिल बाग़-बाग़ हो गया । टेड़े-मेढे ऊँचे-नीचे रास्तों से होते हुए लगभग 11:30 बजे बस देवप्रयाग पहुंची। देवप्रयाग में आधा घंटा कुछ खानपान के लिए बस रुकी रही ।
देवप्रयाग में कुछ सवारियां बस से उतर गयी तो खाली हुई सीटों को भरने के लिए बस कंडक्टर ने आवाज लगनी शुरू कर दी श्रीनगर , रुद्रप्रयाग , जोशीमठ । श्रीनगर का नाम सुनकर मैंने सोचा कि श्रीनगर यहाँ कहाँ से आ गया । मैंने आसपास बैठी कुछ सवारियों से पूछा तो पता चला कि एक श्रीनगर उत्तराखंड में भी है । 1 बजे के करीब बस श्रीनगर पहुंची । उस दिन श्रीनगर में गढ़वाल यूनिवर्सिटी में किसी नेता ने आना था इसीलिए जाम लगा हुआ था । आधे घंटे तक जाम में फंसने के बाद बस आगे बढ़ी ।
रुद्रप्रयाग पहुँचने तक शाम होने लगी थी । रुद्रप्रयाग के बाद बस वाले ने स्पीड पकड़ ली और 8 बजे जोशीमठ पहुंचा दिया । जोशीमठ पहुँच कर बस को सड़क किनारे खड़ा कर दिया । कंडक्टर ने बद्रीनाथ जाने वाली सभी सवारियों से कहा कि सुबह 6 बजे तक सब बस में पहुँच जाना । हमने कंडक्टर से कहा कि हम तो पहली बार इधर आये हैं तो तुम बता दो कि कहाँ पे रुकें । कंडक्टर ने हमे बस के पास ही एक ढाबे पे पहुँचाया । ढाबे वाले से बोला कि इन्हे एक कमरा दे दो । ढाबे के ऊपर की मंजिल पे नीची छत वाले कमरे बने हुए थे । वो कमरे अंदर से काफी गर्म थे जबकि बाहर ठण्ड थी । कमरे में अपना बैग रख कर हमने उसी ढाबे में खाना खाया ।
सुबह 6 बजे तक हम बस में बैठ लिए । 6:15 बजे बस जोशीमठ से बद्रीनाथ की और चल पड़ी । जोशीमठ से आगे ऊँचे -ऊँचे पहाड़ देखकर हम रोमांचित हो उठे । हनुमानचट्टी से आगे घुमावदार रास्तों से होते हुए बस पहाड़ की छोटी तक पहुँच गयी । ऊपर से देखने पर नीचे तलहटी में चलने वाले ट्रक, बस बिल्कुल छोटे -छोटे दिखाई दे रहे थे । बद्रीनाथ से थोड़ा पहले सड़क पे एक झरने के कारण बड़ा सा गड्ढा बना हुआ था । सभी बस, कार, बाइक वाले धीरे -धीरे वहां से निकल रहे थे । बद्रीनाथ पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया । फिर होटल वाले से बद्रीनाथ मंदिर के रास्ते के बारे में पुछा तो उसने बताया कि मंदिर बस आधा किलोमीटर की दूरी पे है ।
जल्दी ही हम बद्रीनाथ मंदिर पहुँच गए । वहां गर्म पानी के कुंड में हम काफी देर तक नहाये । नहाने के बाद बद्री विशाल के दर्शनों के लिए हम लाइन में लग गए । सुबह के समय भीड़ कम थी तो लगभग 20 मिनट में ही हमारा नंबर आ गया । दर्शनों के बाद हमने वहां कुछ फोटो खींचे और वहां के बाजार में कुछ देर घूमते रहे । बाजार से मैंने एक दूरबीन खरीदी फिर वापिस होटल में आ गए ।
होटल में चाय पीने के बाद हम भारतीय सीमा के अंतिम गांव माना जाने के लिए सड़क पे आ गए । एक जीप वाले से माना गांव चलने के लिए पूछा तो उसने आने -जाने के 300 रूपये मांगे । सामने ही लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पे माना गांव दिख रहा था तो हमने पैदल चलना ही बेहतर समझा । काफी सुहावना मौसम था । पहाड़ों पे काफी ऊपर बर्फ नज़र आ रही थी । रास्ते में 2 जगह पहाड़ से झरने सड़क के ऊपर से बह रहे थे । लगभग 1 घंटे में हम माना गांव पहुंच गए । सबसे पहले हम भीम पुल पे पहुंचे । भीम पुल के एक ओर सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है तो दूसरी ओर सरस्वती औऱ अलकनंदा का संगम है । भीम पुल से व्यास गुफा गए । व्यास गुफा के बारे में मैं सोच रहा था कि कोई बड़ी से गुफा होगी जैसी कि फिल्मों में दिखाते हैं । जब व्यास गुफा पहुंचे तो देखा की एक बड़े से तिरछे पत्थर के सामने दीवार बनाकर उसे कमरे की तरह बनाया हुआ है । व्यास गुफा थोड़ी ऊंचाई पे स्तिथ है तो वहां से बद्रीनाथ घाटी का शानदार नज़ारा दिखता है । वहां से गणेश मंदिर देखते हुए हम वापिस माना गांव के प्रवेश द्वार पे पहुँच गए । 2-3 घंटे माना गांव में बिताने के बाद हम पैदल बद्रीनाथ की ओर चल दिए । माना से बद्रीनाथ की वापसी में आसपास के पहाड़ों के इतने शानदार नज़ारे दिखाई दे रहे थे कि मन कर रहा था वहीँ रास्ते के बीच में बैठकर इन नजारों का आनंद लेते रहे लेकिन थोड़ी-थोड़ी देर में हल्की-हल्की बारिश होने लगती औऱ हमें भागना पड़ता । रास्ते में सड़क पे बहते झरनो का आनंद लेते हुए हम वापिस बद्रीनाथ आ गए । अगले दिन की वापसी के लिए एक बस में मैंने शाम को ही टिकट लेकर सीट बुक कर ली । शाम को जोरदार बारिश होने लगी तो होटल वाले ने रात का खाना कमरे में ही भिजवा दिया । हमने कमरे का किराया, चाय और खाने के पैसे भी रात को ही होटल वाले को दे दिए।
अगले दिन सुबह 6 बजे बस बद्रीनाथ से चली । सारी रात बारिश होने के कारण बद्रीनाथ से निकलते ही रास्ते में सड़क पे झरनों की बहार थी । बारिश के कारण पांडुकेश्वर के पास रास्ते में पहाड़ का मलबा सड़क पे आ गया था इसीलिए लगभग 1 घंटे तक बस वहां रुकी रही और दोपहर ३ बजे तक हरिद्वार पहुँच गयी । हरिद्वार में हमने एक लॉज में कमरा लिया । अगले दिन सुबह माता मनसा देवी के दर्शनों के बाद लगभग 11 बजे रूम खाली कर दिया और हरिद्धार के बाजार में घूमते-फिरते हुए 1 बजे तक रेलवे स्टेशन पहुंच गए । हरिद्धार से 2:15 बजे चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस में हम शाम 5 बजे के करीब अम्बाला पहुंचे । अम्बाला से हिमालय क्वीन में हम रात 9 बजे तक पानीपत पहुंच गए ।
जय बद्रीविशाल
बद्रीनाथ यात्रा का कुल खर्चा - 4150/3 = 1383 रूपये प्रति व्यक्ति
किराया
पानीपत से अम्बाला (ट्रेन से)- 135 रूपये
अम्बाला से ऋषिकेश (ट्रेन से)- 156 रूपये
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से ऋषिकेश बसअड्डा (ऑटो से)- 25 रूपये
ऋषिकेश से बद्रीनाथ (बस से)- 705 रूपये
जोशीमठ में कमरे का किराया- 100 रूपये
बद्रीनाथ में कमरे का किराया- 100 रूपये
बद्रीनाथ से हरिद्धार (बस से)- 765 रूपये
हरिद्धार में कमरे का किराया- 100 रूपये
हरिद्धार से अम्बाला (ट्रेन से)- 150 रूपये
अम्बाला से पानीपत (ट्रेन से)-108 रूपये
खाना और अन्य खर्चे
फोन, चाय, पानी की बोतल- 38 रूपये
नाश्ता और कैमरे की रील- 160 रूपये
फ्रूटी और पानी की बोतल -32 रूपये
दूध और चाय- 56 रूपये
जोशीमठ में रात का खाना- 100 रूपये
बद्रीनाथ में खाना- 216 रूपये
माना गांव में कोल्ड ड्रिंक-62 रूपये
रुद्रप्रयाग में खाना - 228 रूपये
हरिद्धार में खाना- 200 रूपये
अन्य खर्चे- 714 रूपये
रील वाले कैमरे से सेल्फी
तप्त कुंड, बद्रीनाथ
जय बद्रीविशाल
माना गांव के रास्ते में
माना गांव के रास्ते में







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