यह किस्सा अगस्त 2016 का है | ऐसे ही ऑफिस में बैठे हुए मैं अपने दोस्तों
के साथ कहीं घूमने जाने की प्लानिंग कर रहा था | हालांकि प्लान तो लगभग 1
महीने से बन रहा था और साथ में चलने वाले बंदे बंदे भी 4-5 थे | काफी सोच
विचार के बाद हमने चोपता जाने का प्लान बनाया | मेरे ऑफिस के दोस्त दीपक,
उस्मान, आदित्य और मैं | हम चार बंदे बाइक से चलने को तैयार हुए |
उस्मान के पास Discover 150cc बाइक थी और दूसरी बाइक हमने उस्मान के
दोस्त की हरिद्वार से लेनी थी | वह यामाहा FZ थी | आदित्य ने चलने से 1
दिन पहले ही मना कर दिया कि वह नहीं आएगा | अब हम तीन रह गए तो यह तय हुआ
कि मैं बस से जाऊंगा और उस्मान और दीपक बाइक से आएंगे | मैंने 12 अगस्त
की सुबह 5:00 बजे पानीपत से हरिद्वार जाने वाली बस पकड़ी | सुबह-सुबह
सड़क बिल्कुल खाली थी और इसी का फायदा उठाते हुए बस पूरी गति से दौड़ी
चली जा रही थी | वैसे भी हरियाणा रोडवेज के ड्राइवर अपनी रफ्तार के लिए
मशहूर हैं | रास्ते में मंगलोर के आसपास 20 मिनट के लिए बस रुकी | वहां
पर मैंने हल्का फुल्का नाश्ता किया और उस्मान को फोन करके उनकी स्थिति की
जानकारी ली | उसने बताया कि वह अभी तक पानीपत से चला नहीं था क्योंकि
दीपक को 30 किलोमीटर दूर सफीदों से आना था इसलिए वह लेट हो गया |
20 मिनट के बाद हमारी बस चल पड़ी और लगभग 9:00 बजे मैं हरिद्वार बसस्टैंड
पहुंच गया | धूप काफी तेज थी | मैंने सोचा जब तक उस्मान और दीपक आते हैं
तब तक मैं गंगा स्नान कर लेता हूँ इसलिए मैंने हर की पौड़ी जाने के लिए
एक ई रिक्शा वाले से पूछा तो उसने बोला कि 15 रूपये लगेंगे मैंने कहा ठीक
है और ठीक 10 मिनट के बाद उसने मुझे हर की पौड़ी पर पहुंचा दिया | वहां
पहुंचकर मैंने सबसे पहले उस्मान को फोन किया तो पता चला उन्होंने अभी अभी
मंगलोर क्रॉस किया है | इसका मतलब था कि उनको आने में अभी एक घंटा और
लगेगा | तब तक मैंने हरिद्वार हर की पौड़ी की मार्केट का एक चक्कर लगाया
और एक चश्मा और एक गमछा लिया धूप से बचने के लिए |
हमारे पास कुल 3 दिन थे | चोपता जाकर वापस पानीपत पहुंचने के लिए और आज
का दिन लगभग आधा निकल चुका था | मेरी झुंझलाहट बढ़ रही थी एक तो गर्मी और
ऊपर से उस्मान का फोन नहीं लग रहा था | जिस तरफ पार्किंग के लिए जगह है
उधर के घाट पर मैंने अपना सामान रखा और गंगा में डुबकी लगाई गंगा का पानी
एकदम ठंडा और शीतलता प्रदान कर रहा था | लगभग आधा घंटा नहाने के बाद
मैंने कपड़े पहने और उस्मान को फोन लगाया तब उसका फोन लग गया उसने बताया
कि वह रुड़की में है और बाइक में पंचर लगवा रहा है | इस तरह अभी उसको आने
में थोड़ा और समय लगेगा उसने मुझे अपने दोस्त का एड्रेस बताया और कहां कि
मैं वहां से उसकी बाइक ले लूं | उसके दोस्त का कमरा हरिद्वार रेलवे
स्टेशन से आगे एक कॉलोनी में था | मैंने हर की पौड़ी से ऑटो पकड़ा और
रेलवे स्टेशन के बाहर पहुंच गया | वहां पर थोड़ी देर इंतजार करने के बाद
उस्मान और दीपक भी आ गए | तब तक लगभग 11:30 बज चुके थे | फिर हमने उसके
दोस्त वाली बाइक ली और हर की पौड़ी पहुंचे | हालांकि मैं चाहता था कि हम
सीधे ऋषिकेश की तरफ चलें लेकिन उस्मान और दीपक बोले कि हम पहले गंगा में
नहाएंगे और उसके बाद आगे चलेंगे | मैंने उनको समझाया कि तुम ऋषिकेश से
आगे निकलने के बाद गंगा में डुबकी लगा लेना क्योंकि आज हम पहले ही काफी
लेट हो चुके थे लेकिन वह दोनों बोले कि हम तो नहा कर ही चलेंगे | मैंने
भी कहा ठीक है तुम दोनों जल्दी नहाओ फिर चलते हैं |
लगभग आधे घंटे बाद दोनों नहा धोकर चलने को तैयार हुए | हम ऋषिकेश की तरफ
1 किलोमीटर चले और एक पेट्रोल पंप पर बाइक में तेल डलवाया | वहां पर
मैंने पंप वाले से पूछा कि चोपता तक पहुंचने में लगभग कितना समय लग जाएगा
तो पंप वाले ने बताया की अगर आप लोग अच्छी बाइक चला लेते हो पहाड़ों में
तो शाम तक रुद्रप्रयाग पहुंच जाओगे | लेकिन उसने यह भी बताया कि अभी ऊपर
पहाड़ों में काफी बारिश हो रही है और इस वजह से जगह जगह रास्ता भी खराब
मिलेगा | उसकी बातें मुझे एकदम ठीक लगी क्योंकि अगस्त में मानसून पहाड़ों
में अपना जोर दिखाता है | हमने आपस में थोड़ी सी बहस के बाद चोपता जाना
कैंसिल कर दिया और मसूरी जाना तय हुआ | फिर हम हरिद्वार से ऋषिकेश रोड पर
चल पड़े | आगे जाकर देहरादून वाले रास्ते की तरफ मुड़ गए | हम सुबह से चल
रहे थे और अभी तक कुछ खाना भी खास नहीं खाया था | उस्मान घर से परांठे
लेकर आया था साथ में आम का अचार भी था और मौसम भी बड़ा शानदार हो गया था
एकदम बारिश का माहौल हो गया | हमने सड़क के किनारे बाइक रोकी और फटाफट
पराठे निपटा दिए| धीरे-धीरे बारिश भी हल्की-हल्की बूंदों के साथ शुरू हो
गयी । देहरादून से मसूरी रोड पर निकल कर हमने एक दुकान से कुछ खाने-पीने
का सामान लिया । बातों-बातों में दुकानदार ने बताया कि मसूरी कि तरफ काफी
बारिश हो रही है और वहां जाने का कोई फायदा नहीं है । हमने उससे आसपास
कोई घूमने लायक जगह पूछी तो दुकानदार बोला कि सहस्त्रधारा चले जाओ यहाँ
से 15 किलोमीटर दूर है । हमने भी बाइक को सहस्त्रधारा कि ओर मोड़ लिया ओर
लगभग 30 मिनट में हम घुमावदार रास्तों से होते हुए सहस्त्रधारा पहुँच गए
। सहस्त्रधारा की शानदार घाटी देख कर दिल गार्डन-गार्डन हो गया मतलब
बाग़-बाग़ हो गया । बड़ा ही विहंगम दृश्य हमारे सामने था । दोनों ओर पहाड़ों
से गिरते हुए झरने ओर बीच में सुन्दर नदी । सुना है कि सहस्त्रधारा के
झरनों में नहाने से त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं । लगभग 1 घंटे तक हम
झरने में नहाये और 4 बजे वहां से ऋषिकेश जाने के लिए चल दिए । देहरादून
से कुछ पहले उस्मान ने बताया कि उसकी बाइक की हेडलाइट और हॉर्न काम नहीं
कर रहे हैं
आगे जारी है .......
हर की पौड़ी
के साथ कहीं घूमने जाने की प्लानिंग कर रहा था | हालांकि प्लान तो लगभग 1
महीने से बन रहा था और साथ में चलने वाले बंदे बंदे भी 4-5 थे | काफी सोच
विचार के बाद हमने चोपता जाने का प्लान बनाया | मेरे ऑफिस के दोस्त दीपक,
उस्मान, आदित्य और मैं | हम चार बंदे बाइक से चलने को तैयार हुए |
उस्मान के पास Discover 150cc बाइक थी और दूसरी बाइक हमने उस्मान के
दोस्त की हरिद्वार से लेनी थी | वह यामाहा FZ थी | आदित्य ने चलने से 1
दिन पहले ही मना कर दिया कि वह नहीं आएगा | अब हम तीन रह गए तो यह तय हुआ
कि मैं बस से जाऊंगा और उस्मान और दीपक बाइक से आएंगे | मैंने 12 अगस्त
की सुबह 5:00 बजे पानीपत से हरिद्वार जाने वाली बस पकड़ी | सुबह-सुबह
सड़क बिल्कुल खाली थी और इसी का फायदा उठाते हुए बस पूरी गति से दौड़ी
चली जा रही थी | वैसे भी हरियाणा रोडवेज के ड्राइवर अपनी रफ्तार के लिए
मशहूर हैं | रास्ते में मंगलोर के आसपास 20 मिनट के लिए बस रुकी | वहां
पर मैंने हल्का फुल्का नाश्ता किया और उस्मान को फोन करके उनकी स्थिति की
जानकारी ली | उसने बताया कि वह अभी तक पानीपत से चला नहीं था क्योंकि
दीपक को 30 किलोमीटर दूर सफीदों से आना था इसलिए वह लेट हो गया |
20 मिनट के बाद हमारी बस चल पड़ी और लगभग 9:00 बजे मैं हरिद्वार बसस्टैंड
पहुंच गया | धूप काफी तेज थी | मैंने सोचा जब तक उस्मान और दीपक आते हैं
तब तक मैं गंगा स्नान कर लेता हूँ इसलिए मैंने हर की पौड़ी जाने के लिए
एक ई रिक्शा वाले से पूछा तो उसने बोला कि 15 रूपये लगेंगे मैंने कहा ठीक
है और ठीक 10 मिनट के बाद उसने मुझे हर की पौड़ी पर पहुंचा दिया | वहां
पहुंचकर मैंने सबसे पहले उस्मान को फोन किया तो पता चला उन्होंने अभी अभी
मंगलोर क्रॉस किया है | इसका मतलब था कि उनको आने में अभी एक घंटा और
लगेगा | तब तक मैंने हरिद्वार हर की पौड़ी की मार्केट का एक चक्कर लगाया
और एक चश्मा और एक गमछा लिया धूप से बचने के लिए |
हमारे पास कुल 3 दिन थे | चोपता जाकर वापस पानीपत पहुंचने के लिए और आज
का दिन लगभग आधा निकल चुका था | मेरी झुंझलाहट बढ़ रही थी एक तो गर्मी और
ऊपर से उस्मान का फोन नहीं लग रहा था | जिस तरफ पार्किंग के लिए जगह है
उधर के घाट पर मैंने अपना सामान रखा और गंगा में डुबकी लगाई गंगा का पानी
एकदम ठंडा और शीतलता प्रदान कर रहा था | लगभग आधा घंटा नहाने के बाद
मैंने कपड़े पहने और उस्मान को फोन लगाया तब उसका फोन लग गया उसने बताया
कि वह रुड़की में है और बाइक में पंचर लगवा रहा है | इस तरह अभी उसको आने
में थोड़ा और समय लगेगा उसने मुझे अपने दोस्त का एड्रेस बताया और कहां कि
मैं वहां से उसकी बाइक ले लूं | उसके दोस्त का कमरा हरिद्वार रेलवे
स्टेशन से आगे एक कॉलोनी में था | मैंने हर की पौड़ी से ऑटो पकड़ा और
रेलवे स्टेशन के बाहर पहुंच गया | वहां पर थोड़ी देर इंतजार करने के बाद
उस्मान और दीपक भी आ गए | तब तक लगभग 11:30 बज चुके थे | फिर हमने उसके
दोस्त वाली बाइक ली और हर की पौड़ी पहुंचे | हालांकि मैं चाहता था कि हम
सीधे ऋषिकेश की तरफ चलें लेकिन उस्मान और दीपक बोले कि हम पहले गंगा में
नहाएंगे और उसके बाद आगे चलेंगे | मैंने उनको समझाया कि तुम ऋषिकेश से
आगे निकलने के बाद गंगा में डुबकी लगा लेना क्योंकि आज हम पहले ही काफी
लेट हो चुके थे लेकिन वह दोनों बोले कि हम तो नहा कर ही चलेंगे | मैंने
भी कहा ठीक है तुम दोनों जल्दी नहाओ फिर चलते हैं |
लगभग आधे घंटे बाद दोनों नहा धोकर चलने को तैयार हुए | हम ऋषिकेश की तरफ
1 किलोमीटर चले और एक पेट्रोल पंप पर बाइक में तेल डलवाया | वहां पर
मैंने पंप वाले से पूछा कि चोपता तक पहुंचने में लगभग कितना समय लग जाएगा
तो पंप वाले ने बताया की अगर आप लोग अच्छी बाइक चला लेते हो पहाड़ों में
तो शाम तक रुद्रप्रयाग पहुंच जाओगे | लेकिन उसने यह भी बताया कि अभी ऊपर
पहाड़ों में काफी बारिश हो रही है और इस वजह से जगह जगह रास्ता भी खराब
मिलेगा | उसकी बातें मुझे एकदम ठीक लगी क्योंकि अगस्त में मानसून पहाड़ों
में अपना जोर दिखाता है | हमने आपस में थोड़ी सी बहस के बाद चोपता जाना
कैंसिल कर दिया और मसूरी जाना तय हुआ | फिर हम हरिद्वार से ऋषिकेश रोड पर
चल पड़े | आगे जाकर देहरादून वाले रास्ते की तरफ मुड़ गए | हम सुबह से चल
रहे थे और अभी तक कुछ खाना भी खास नहीं खाया था | उस्मान घर से परांठे
लेकर आया था साथ में आम का अचार भी था और मौसम भी बड़ा शानदार हो गया था
एकदम बारिश का माहौल हो गया | हमने सड़क के किनारे बाइक रोकी और फटाफट
पराठे निपटा दिए| धीरे-धीरे बारिश भी हल्की-हल्की बूंदों के साथ शुरू हो
गयी । देहरादून से मसूरी रोड पर निकल कर हमने एक दुकान से कुछ खाने-पीने
का सामान लिया । बातों-बातों में दुकानदार ने बताया कि मसूरी कि तरफ काफी
बारिश हो रही है और वहां जाने का कोई फायदा नहीं है । हमने उससे आसपास
कोई घूमने लायक जगह पूछी तो दुकानदार बोला कि सहस्त्रधारा चले जाओ यहाँ
से 15 किलोमीटर दूर है । हमने भी बाइक को सहस्त्रधारा कि ओर मोड़ लिया ओर
लगभग 30 मिनट में हम घुमावदार रास्तों से होते हुए सहस्त्रधारा पहुँच गए
। सहस्त्रधारा की शानदार घाटी देख कर दिल गार्डन-गार्डन हो गया मतलब
बाग़-बाग़ हो गया । बड़ा ही विहंगम दृश्य हमारे सामने था । दोनों ओर पहाड़ों
से गिरते हुए झरने ओर बीच में सुन्दर नदी । सुना है कि सहस्त्रधारा के
झरनों में नहाने से त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं । लगभग 1 घंटे तक हम
झरने में नहाये और 4 बजे वहां से ऋषिकेश जाने के लिए चल दिए । देहरादून
से कुछ पहले उस्मान ने बताया कि उसकी बाइक की हेडलाइट और हॉर्न काम नहीं
कर रहे हैं
आगे जारी है .......
हर की पौड़ी
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| हर की पौड़ी |
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| हर की पौड़ी |
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| देहरादून की ओर जाते हुए |
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| रोड किनारे लंच |
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| मैं और उस्मान |
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| सहस्त्रधारा की ओर |
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| सहस्त्रधारा की ओर |
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| सहस्त्रधारा झरना |
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| सहस्त्रधारा झरना |
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| सहस्त्रधारा की ओर से आती हुई नदी |











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