Panipat to Jawalamukhi and back in 29 hours
ये मेरा पहला यात्रा वृतांत है | इसीलिए ज्यादा इधर उधर की बातें न करते हुए मैं सीधे मतलब की बात पे आता हूँ | दरअसल मैंने अभी तक काफी यात्रायें कर रखी हैं लेकिन यहाँ शुरुआत बाइक यात्रा से करता हूँ | हुआ यूँ कि जुलाई 2017 में मैंने अपने ऑफिस के दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बनाया और उत्तराखंड में तुंगनाथ की यात्रा करना तय हुआ |
अब बारी ऑफिस से छुट्टी लेने की थी | ये भी एक मुख्य समस्या होती है या फिर यूँ कह लो कि एक जंग लड़ना होता है बॉस के साथ छुट्टी के लिए | लेकिन हमने इसका एक हल निकल लिया | अगस्त में 13 तारीख को रविवार था और 15 को वैसे ही छुट्टी थी स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में | इसीलिए सिर्फ एक छुट्टी लेनी थी 14 की | लेकिन जब मैंने उत्तराखंड के मौसम के बारे में पता किया तो हमारा प्लान ध्वस्त हो गया क्योंकि अगस्त में तो पूरे हिमालय में बारिश होती है | बारिश का नाम सुन के सब पीछे हट गए |
लेकिन मेरा मन अब एक लांग ड्राइव का बन चुका था | तो मैंने अपने ताऊ के लड़के विक्रांत को फ़ोन किया जोकि गुरुग्राम में जॉब करता है | विक्रांत के पास बुलेट 350 सीसी बाइक है | उससे बात करके हमने हिमाचल प्रदेश के जवालामुखी जाना तय किया जोकि पानीपत से लगभग 350 किलोमीटर की दूरी पर है । विक्रांत ने कहा कि अभी उसको छुट्टी तो नहीं मिल सकती लेकिन मैंने कहा हम शनिवार 29 जुलाई को शाम 4 बजे पानीपत से चलेंगे और रविवार को रात तक वापिस आ जायेंगे | इस तरह तुम शनिवार को हाफ डे कि छुट्टी ले लेना | तो हमारा प्लान सेट हो गया |
29 जुलाई को शाम 4:15 बजे हम पानीपत से चले | हमने पानीपत से ही बाइक की टंकी फुल करवा ली और देखते ही देखते हम लगभग 45 मिनट में कुरुक्षेत्र पहुँच गए | कुरुक्षेत्र पहुँचकर हमने बाइक की चेन में मोबिल आयल डलवाया | पानीपत से अम्बाला की दूरी वैसे तो 119 किलोमीटर है लेकिन समय की कमी को देखते हुए हम काफी तेजी से चल रहे थे और 5:30 बजे हम अम्बाला पहुँच गए | अम्बाला से हम अम्बाला-लुधियाना हाईवे पर शम्भू बैरियर से दाई ओर रुपनगर की तरफ मुड़ गए | कुछ एक जगह को छोड़ के रास्ता बहुत ही शानदार था |
खरार, कुराली, रूपनगर और किरतपुर से होते हुए हमने 7:00 बजे आनंदपुर साहिब से लगभग 10 किलोमीटर पहले हमने एक ढाबे पे बाइक रोकी ली । पानीपत से चलने के बाद ये हमारा पहला ब्रेक था जब हम चाय पीने के लिए रुके । आनंदपुर साहिब की तरफ जाने वाले रस्ते पर काफी भीड़ थी काफी संख्या में स्त्री, पुरुष और बच्चे साइकिल, बाइक, ट्रेक्टर-ट्राली और टेम्पो में सवार होके चले जा रहे थे । हमने ढाबे वाले से पूछा कि ये सब कहाँ जा रहे हैं । ढाबे वाला बोला कि ये सब नैना देवी और जवाला जी जा रहे हैं । 15 मिनट के ब्रेक के बाद हमने भी अपनी बाइक अपनी मंजिल की ओर दौड़ा ली । आनंदपुर साहिब से 25 किलोमीटर के बाद नांगल डैम आता है । नांगल डैम के पुल कि चौड़ाई सिंगल लेन सड़क जितनी ही है और शाम का समय होने के कारण वहां काफी भीड़ थी इसीलिए हमे वहां से निकलने में लगभग 10 मिनट लग गए । इस दौरान हमारी बाइक में पेट्रोल भी खत्म हो गया और बाइक रिज़र्व में लग गयी | नांगल डैम से निकलते ही कुछ दूर चल कर बायीं ओर हमे एक पेट्रोल पंप नज़र आया । हमने पेट्रोल लेने के लिए बाइक वहां रोक ली । बाइक रुकते ही मेरी नज़र पंप के डिजिटल मीटर पर गयी वहां पर पेट्रोल का रेट 70 रूपये के आस पास लिखा हुआ था । हमने पंप वाले से पूछा कि पंजाब में पेट्रोल महंगा है क्या तो उसने कहा हाँ और साथ ही हमे कहा कि आप लोग आगे चले जाओ 5 किलोमीटर के बाद हिमाचल शुरू हो जायेगा वहां पे पेट्रोल कुछ सस्ता है । हम उसको धन्यवाद बोलकर आगे बढ़ चले । रास्ते में एक पेट्रोल पंप आया लेकिन वहां काफी भीड़ थी इसीलिए हम वहां से आगे चल दिए । ऊना पहुँच कर हमने अपनी बाइक में पेट्रोल डलवाया । तब तक बिलकुल अँधेरा हो चुका था । हमने पेट्रोल पंप वाले से आगे के रास्ते के बारे में पूछा तो उसने बताया कि रास्ता बिलकुल शानदार है आप लोग आराम से पहुँच जाओगे ।
आपको बताना ही भूल गया | हमने अंबाला से ही अपने फोन में जीपीएस चालू कर लिया था और बगैर किसी से पूछे हम जीपीएस की सहायता से आसानी से चले जा रहे थे । यहाँ तक कि अगर आगे कहीं सड़क ख़राब हालत में है तो जीपीएस उसे भी दिखा देता है । उस दिन हमें GPS की महत्ता का पता चला । ऊना से हम अम्ब पहुंचे । अम्ब से जवालामुखी जाने के लिए दो रास्ते हैं | सीधे चलते हुए एक रास्ता मुबारिकपुर, चिंतपूर्णी, देहरा-गोपीपुर से होते हुए ज्वालामुखी जाता है। दूसरा रास्ता अम्ब से दायीं तरफ मुड़कर कलोह, परागपुर, देहरा-गोपीपुर होते हुए और एक तीसरा रास्ता कलोह से दाहिनी तरफ चल के नादौन होते हुए जवालामुखी पहुँचता है । हमने तीसरा रास्ता चुना क्यों जीपीएस दिखा रहा था कि पहले दो रास्तों पर सड़क ज्यादा ख़राब हालत में है । जीपीएस नामक मित्र की सहायता से हम 10:45 बजे ज्वालामुखी पहुंचे । एक तो हम कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में थे और दूसरा ये कि हमारे पास फोटो लेने के लिए सिर्फ मोबाइल ही था इसीलिए फोटो भी कम ही लिए । इसके लिए माफ़ करना और कोई गलती हो तो कृप्या बताना
ज्वालामुखी पहुँच कर जब हमने वहां का नज़ारा देखा तो दंग रह गए क्योंकि हर तरफ लोगों की भीड़ नज़र आ रही थी । हमने लगभग हर होटल और धर्मशाला में कमरा तलाश किया लेकिन सब के सब सिनेमा की तरह हाउसफुल थे । एक-दो होटल में कमरा मिल रहा था लेकिन उनका रेट आम दिनों से कुछ ज्यादा ही था । एक घंटे तक इधर उधर घूम फिर कर हमने होटल राज में एक कमरा ले लिया । रेट 1200 /- उस समय रात के 12 बज चुके थे । हमने कमरे में जाते ही खाने का आर्डर दिया । खाने के बाद हम नहा धोकर मंदिर की ओर चल दिए । उस समय मंदिर की तरफ जाने वाली गली बिलकुल सुनसान थी । एक्का-दुक्का ही लोग नज़र आ रहे थे । कुछ दुकाने भी खुली हुई थी । मंदिर के मुख्य द्वार के समीप हमने एक दुकान पर अपनी चप्पलें रखी ओर वहां से पूजा की थाली ली । दुकानदार ने बताया की आज यहाँ काफी भीड़ थी और अभी 8 बजे तक लम्बी लाइन लगी हुई थी । उसने ये भी बताया कि पिछले तीन दिन से यहाँ कोई मेला लगा हुआ था इसीलिए मंदिर के द्वार तीन तक 24 घंटे खुले रहे नहीं तो आम दिनों में सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक ही मंदिर के द्वार खुलते हैं ।
मंदिर में उस समय भी काफी भीड़ थी और हमे जवाला जी के दर्शन करने में लगभग 40 मिनट लग गए । उसके पश्चात हम वापिस होटल में आ गए । अगले दिन सुबह हमने सोचा था कि चलने से पहले एक बार फिर मंदिर में जायेंगे लेकिन सुबह 7 के बाद जोरदार बारिश शुरू हो गयी और हम होटल से बाहर ही नहीं निकल सके । 8 बजे के आसपास जब बारिश कुछ कम हुई तो हम मंदिर में जाने के लिए निकले लेकिन हमारे निकलते ही फिर से बारिश शुरू हो गयी । हमने बाजार से प्रसाद वगैरा लिया और होटल में वापिस आ गए । होटल में ही हमने नाश्ता किया और बारिश रुकने का इंतज़ार करने लगे मगर बारिश तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी । आखिरकार 11:30 बजे हमने अपना सामान उठाया और होटल वाले का हिसाब किताब करके चल पड़े । मैं घर से ही 2 बड़ी बड़ी प्लास्टिक की थैलिया ले के गया था । हमने अपने बैग उन थैलियों में बांध लिए और बारिश में ही निकल पड़े । बारिश के कारण मौसम बड़ा ही सुहावना हो गया था । आसपास के पहाड़ हरियाली से भरे हुए बारिश में नहाये हुए एक दम मस्त .....बोले तो झक्कास लग रहे थे लेकिन लगातार बारिश होते रहने की वजह से हम एक भी फोटो नहीं ले सके ।
4 बजे के आसपास हमने खाना खाने के लिए हम रूपनगर से थोड़ा पहले K SURPALZ MOTEL में रुके । वहां से खाना खा के हम 4:40 पर चले । अम्बाला तक ज़ोरदार बारिश होती रही । लेकिन हमने भी सोच रखा था कि कितनी भी बारिश क्यों ना आ जाये हम नहीं रुकेंगे । बारिश में भीगते हुए हम 9:15 बजे पानीपत पहुंचे । प्लास्टिक की बड़ी पॉलीथिन का हमे बहुत फायदा हुआ । घर पहुँचने तक पानी की एक बूँद भी हमारे सामान तक नहीं पहुँच सकी ।
धन्यवाद








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