मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

काँगड़ा वैल्ली-1

सितम्बर 2015 में मैंने अपनी पत्नी नवीन और बेटे हिमांक (उस समय 9 महीने
का था ) के साथ हिमाचल घूमने का प्लान बनाया ।

प्लान कुछ इस तरह से था । 9 सितम्बर की रात को जाना औ
वापसी । पानीपत - पठानकोट - धर्मशाला - चामुंडा देवी - पालमपुर - मंडी -
पानीपत ।

लेकिन प्लान हिमाचल पहुँचने के बाद बदल गया । उसके बारे में बाद में बताऊंगा ।

पठानकोट तक ट्रेन से जाना था इसीलिए मैंने 1 महीने पहले ही उत्तर संपर्क
क्रांति में स्लीपर क्लास में 2 सीट आरक्षित करवा दी थी । 9 सितम्बर को
ट्रेन अपने निर्धारित समय रात 10:10 मिनट पे पहुँची और हम तो 1 घंटा पहले
ही स्टेशन पर पहुँच चुके थे । सारी रात ट्रेन चलती रही लेकिन सुबह जब
पठानकोट पहुँची तो अपने समय से 1घंटे की देरी से चल रही थी ।

पठानकोट रेलवे स्टेशन से हम रिक्शा द्वारा बसस्टैंड पहुँचे । तब तक सुबह
के 7 बज चुके थे । वहां पर धर्मशाला जाने वाली बस के बारे में पूछा तो
पता चला कि वो तो आधा घंटा पहले जा चुकी है और अगली बस 1 घंटे के बाद
जाएगी । बसस्टैंड की टिकट खिड़की पे मौजूद आदमी ने एक बस की ओर इशारा करते
हुए बताया कि इस बस में बैठ जाओ ये आपको गग्गल उतार देगी वहां से
धर्मशाला के लिए आराम से बस मिल जाएगी । हमें भी उसकी बात सही लगी और
उसकी बताई हुई बस में बैठ लिए । लगभग 9:30 बजे बस गग्गल पहुँची । बस से
उतरते ही हमें धर्मशाला जाने वाली मिनी बस मिल गयी और ठीक 10 बजे हम
धर्मशाला बसस्टैंड पर पहुँच गए । बसस्टैंड से ऊपर की ओर जाकर हमें एक
गेस्ट हाउस में साफ़ सुथरा कमरा मिल गया ।
सुबह से हमने कुछ भी नहीं खाया था इसीलिए कमरे पर अपने बैग को पटककर हम
खाना खाने के लिए बाहर निकले । गेस्ट हाउस के साथ ही एक रेस्टोरेंट था ।
पहले तो वहां से दूध लेकर हिमांक को पिलाया । फिर वहां से खाना खा के हम
वापिस गेस्ट हाउस में आ गए । फिर जल्दी से नहा-धोकर मैक्लोडगंज घूमने के
लिए निकल लिए । धर्मशाला से मैक्लोडगंज जाने के लिए हम एक सवारी जीप में
बैठे और लगभग 20 मिनट में मक्लोडगंज पहुँच गए ।

जीप से उतरते ही हमने एक ऑटो वाले से आसपास की जगहों पर घुमाने की बात कर
ली । थोड़ा मोल-भाव करके ऑटो वाला 500/- रूपये में घुमाने को तैयार हो गया
। ऑटो वाला सबसे पहले हमें भागसूनाग मंदिर लेके गया । हमने मंदिर और उसके
आसपास की जगह देखने के बाद भागसूनाग झरने पर जाने की सोची लेकिन उस समय
धूप बहुत ज्यादा थी और हिमांक को इतनी तेज धूप में लेकर जाना ठीक नहीं था
। इसीलिए हमें दूर से ही झरने को देख कर काम चलाना पड़ा ।

इसके बाद हम दलाई लामा मंदिर में पहुंचे । भीड़ भी काफी थी लेकिन फिर भी
वहां का वातावरण एकदम शांत था । लेकिन एक बात जो भारत के लगभग हर मंदिर
में लिखी होती "फोटो खींचना मना है" वो यहाँ भी लिखी हुई थी । एक बात समझ
में नहीं आती कि जब हर मंदिर और अन्य फोटोग्राफी प्रतिबंधित जगहों की
फोटो इंटरनेट पर मौजूद रहती है तो फिर "फोटो खींचना मना है" लिखने की
क्या जरूरत है ।:x
वहां से बाहर आते ही हमारा ऑटो वाला बोला चलो अब डल झील चलते हैं । मैंने
बोला भाई कहीं देसी का पव्वा तो नहीं लगा लिया तूने । डल झील तो कश्मीर
में है । ऑटो वाला बोला कि यहाँ भी एक झील का नाम डल झील है

डल झील देखने में भले ही छोटी है लेकिन उसके आसपास घने वृक्षों ने झील की
आभा को निखार के रखा है । थोड़ी देर वहां घूमने के बाद हम नड्डी पहुंचे ।
वहां से धौलाधार रेंज का बड़ा ही शानदार नज़ारा दिखाई देता है । वहीं पर एक
व्यक्ति ने अपनी दूरबीन जमा रखी थी और 20-20 रूपये में आसपास की पहाड़ियों
के नज़दीक से दर्शन करवा रहा था । हमने भी मौका नहीं छोड़ा और दूरबीन से
धौलाधार, त्रिउंड और घाटी की तलहटी में बहती हुई नदियों का नज़ारा लिया ।
अब तक शाम के लगभग 4 बज चुके थे और हमारा अगला पड़ाव था चर्च जोकि
मैक्लोडगंज के नजदीक ही है । चर्च उस समय बंद था इसीलिए उसको बाहर से ही
देखा गया । चर्च के बाहर एक बहुत बड़ा घंटा भी लटका हुआ था । उसको भी देखा
गया । फिर मैक्लोडगंज से एक जीप में बैठ कर हम वापिस धर्मशाला आ गए ।
कुछ देर बाजार में घुमते रहे । जैसे-जैसे शाम होती जा रही थी वैसे ही
मौसम भी ठंडा हो रहा था । इसीलिए वापिस अपने कमरे में आ गए। अगले दिन
सुबह 7 हमने धर्मशाला से चामुंडा देवी जाने वाली बस पकड़ी और लगभग 40 मिनट
में हम चामुंडा देवी मंदिर पहुँच गए । मंदिर से बाहर सड़क के किनारे पे
लगी हुई एक दुकान में हमने अपना सामान रखा और वहां से प्रसाद लेकर मंदिर
में गए । जब हम मंदिर में पहुंचे उस समय आरती हो रही थी । इसीलिए वहां
काफी भीड़ थी । आरती समाप्त होने के बाद हमने माँ चामुंडा देवी के लाल
कपड़ों में लिपटी हुई पिंडी के दर्शन किये । इसके बाद हम मंदिर के पीछे की
ओर गए जहाँ एक छोटी सी गुफा में भगवान शिव के शिवलिंग रूप में दर्शन किये
डा देवी मंदिर एक नदी के किनारे पर बना हुआ है । नदी में पानी कम था
इसीलिए नदी में पड़े हुए बड़े-बड़े पत्थर और आसपास के पहाड़ बड़ा ही मनमोहक
नज़ारा प्रस्तुत कर रहे थे ।

मंदिर से हम वापिस उसी दुकान पर आये जहाँ हमने अपना सामान रखा था ।
प्लान यहाँ से बदला जब हम चलने लगे तो दुकानदार ने ऐसे ही पूछ लिया कि
भाई आगे कहाँ जाओगे । मैंने कहा पालमपुर तो दुकानदार बोला कि इस मौसम में
पालमपुर जाने का कोई फायदा नहीं है । वहां काफी गर्मी होगी अभी । तो
मैंने पूछा कि कोई और जगह बता दो आसपास घूमने की । दुकानदार बोला कि यहाँ
से काँगड़ा चले जाओ और वहां से ज्वालामुखी । मुझे उसकी बात कुछ ठीक लगी
धर्मशाला की सुबह होटल के कमरे से

डल झील

चर्च

भागसूनाग झरने के दूर से चित्र

चामुंडा देवी मंदिर के पास बहती नदी

हिमांक

भागसूनाग मंदिर के पास


डल झील के किनारे

नड्डी व्यू पॉइंट

नड्डी व्यू पॉइंट

नड्डी व्यू पॉइंट

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