रविवार, 10 दिसंबर 2017

बारिश ने नहीं जाने दिया चोपता 2

हमने एक बाइक रिपेयर की दुकान पे बाइक को दिखाया । मेकैनिक के पास पहले
से ही काफी बाइक खड़ी हुई थी रिपेयर के लिए । मेकैनिक ने बोला कि आधा घंटा
लगेगा । समय लगभग 4:40 मिनट का हो चुका था । हमने सोचा अगर यहाँ पे आधा
घंटा और खड़े रहे तो फिर ऋषिकेश पहुँचने में देर हो जाएगी । सड़क पे दोनों
ओर किसी बाइक रिपेयर की दुकान को देखते हुए हम आगे चल दिए । धीरे-धीरे हम
देहरादून से ऋषिकेश जाने वाले रास्ते पर पहुँच गए लेकिन हमे कोई भी बाइक
रिपेयर की दुकान नज़र नहीं आई । हम देहरादून पहली बार गए थे और रास्तों का
हमे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था । इसीलिए हम देहरादून से जॉली ग्रांट होते
हुए ऋषिकेश जाने वाले रास्ते पर पहुँच गए । हालाँकि उस समय सड़क बहुत ही
अच्छी हालत में थी और इसी वजह से हम काफी तेजी से चले जा रहे थे । सड़क के
दोनों ओर घनघोर जंगल था । दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था । रास्ते में
एक बरसाती नदी सड़क के ऊपर से बह रही थी । क्योंकि सड़क के नीचे से पानी
निकालने के लिए सिर्फ एक पाइप दबा रखा था और नदी में पानी ज्यादा आ रहा
था । नदी की धारा काफी तेज थी । हमने डरते-डरते अपनी बाइक उस धारा से पार
निकाली । जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते जा रहे थे वैसे ही अँधेरा भी होता जा रहा
था । जंगल में चमगादड़ों की फ़ौज पूरी सड़क पर मक्खियों की तरह उड़ रही थी ।
जंगल में कहीं एकदम सन्नाटा था तो कहीं अजीब तरह की आवाजें आ रही थी ।
कुल मिला के सारा दृश्य किसी डरावनी फिल्म से काम नहीं था । आख़िरकार घने
जंगल को पार कर के हम थोड़ा ऊंचाई वाली सड़क पे पहुँचे और दूर एक रोशनी नज़र
आयी । तब जाकर हमारी भी जान में जान आई ।



मैं उस्मान वाली बाइक को चला रहा था और उस्मान दूसरी बाइक पर दीपक के साथ
था | मैंने दीपक को बोला कि वह अपनी बाइक को मेरे से आगे रखें ताकि मैं
उसकी हेड लाइट का अनुसरण करते हुए उनके पीछे पीछे चल सकूँ | रास्ते में
एक गांव आया तब तक बिलकुल अँधेरा हो चुका था | हमने सोचा की रात को यहीं
कहीं रुक जाते हैं | हमने गांव में एक दो आदमी से होटल के बारे में पूछा
लेकिन पता चला कि वहां ठहरने और खाने-पीने की कोई जगह नहीं है | हमें
थोड़ी सी निराशा भी हुई | लेकिन फिर हम आगे बढ़ चले | आगे का रास्ता
दो-तीन किलोमीटर बिल्कुल खराब था | ऐसे हालात में मन में नकारात्मक विचार
भी उत्पन्न हो रहे थे | मैं सोच रहा था अगर यहां बाइक में पंक्चर भी हो
गया तो दूर-दूर तक कोई दुकान नहीं है | लेकिन धीरे धीरे भोले शंकर को याद
करते हुए हम ऋषिकेश के नजदीक जा पहुंचे जहां से हम हरिद्वार-ऋषिकेश हाईवे
पर चढ़े | वहां से मैं दीपक और उस्मान से आगे निकल गया | रास्ते में एक
कार जा रही थी और मैं भी उसके पीछे चल पड़ा | कार की रफ़्तार को पकड़ने के
लिए मैंने भी बाइक की रफ़्तार को बढ़ा दिया । आगे तीखा मोड़ था जिसका मुझे
पता नहीं चला और कार वाले ने एक दम से मोड़ पे कार को घुमा लिया । सामने
गहरी खाई थी । मैंने बाइक के दोनों ब्रेक दबा दिए । चूँ.... चूँ....
चूँ.....की ज़ोरदार आवाज रात के सन्नाटे में सड़क पे गूँज उठी ।भगवान की
दया से सब कुछ सही सलामत रहा :oops:| अब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो दीपक
और उस्मान की बाइक भी नहीं दिख रही थी | मैं धीरे धीरे सड़क के बीच वाली
सफेद पट्टी को देखते हुए आगे बढ़ चला और ऋषिकेश से थोड़ा पहले एक होटल के
सामने रुक गया | थोड़ी ही देर में उस्मान और दीपक भी आ गए | उन्होंने
बताया कि उस्मान के हाथ से हेलमेट गिर गया था और वह उसको उठाने के चक्कर
में पीछे रह गए | सामने की तरफ ऋषिकेश शहर का बड़ा ही शानदार दृश्य दिखाई
दे रहा था ऊंचे-नीचे बिल्डिंगों पर रोशनी जगमगा रही थी | फिर हम सीधे राम
झूले की तरफ चल पडे और उसके पास ही है एक गेस्ट हाउस में हमने एक रूम
लिया | गेस्ट हाउस के सामने गंगा मैया का बड़ा ही शानदार नजारा था | रात
में आसपास की रोशनियों का प्रतिबिंब गंगा की लहरों में शानदार दृश्य बन
रहा था |

हमने अपना सामान रूम में रखा और फ्रेश होकर खाना खाने के लिए बाहर मुख्य
हाईवे की तरफ गए | तब तक 9:00 बज चुके थे और लगभग सब दुकानें बंद हो चुकी
थी | काफी आगे जाकर हमें एक रेस्टोरेंट खुला हुआ मिला | हमने वहां पर
खाना खाया और गंगा की लहरों को देखते हुए वापिस कमरे पर आ गए | कल सुबह
नीलकंठ महादेव जाने का प्लान बनाया | मैं सुबह 5:00 बजे उठा और गेस्ट
हाउस की बालकनी मैं खड़ा हो गया सामने का नजारा बड़ा ही सुंदर और मौसम
सुहावना नजर आ रहा था | फिर मैंने दीपक और उस्मान को उठाया |

भूतनाथ झरने की खोज

उस्मान बोला मैं अभी सुट्टा मार के आया और बाहर चला गया थोड़ी देर बाद
वापस आया तब तक मैं और दीपक नहा चुके थे | हमने उसको बोला कि तू भी नहा
ले लेकिन वह बोला कि मैं अभी बाहर से पता करके आया हूं कि यहां पर आस पास
कोई भूतनाथ के नाम से झरना है वहीं पर जा कर नहाऊंगा | हमने भी कहा चलो
ठीक है | कमरे पर ताला लगाकर हम बाहर आए और जैसे ही बाइक को स्टैंड से
उतारा तब तो पता चला कि डिस्कवर का पिछला पहिया पंक्चर है | इतनी
सुबह-सुबह पंक्चर की कोई दुकान भी नहीं खुली मिली:mad: | हमने सोचा कि
पहले भूतनाथ झरने पर चलते हैं फिर जीप से नीलकंठ जायेंगे | फिर हम तीनों
एक बाइक पर सवार हो गए हालांकि यह सही नहीं था लेकिन हमारी मजबूरी भी थी
| फिर हम भूतनाथ झरने की खोज में निकल पड़े | पूछते-पूछते नीलकंठ महादेव
के टैक्सी स्टैंड पर पहुंच गए | वहां पर एक साधु महाराज ने एक ओर इशारा
कर के बताया कि ये जो ऊपर की तरफ रास्ता जा रहा है उस पर थोड़ा आगे जा कर
भूतनाथ झरना है | हम भी सीधे उधर चले गए | आगे जा कर एक ओर आदमी से पूछा
तो उसने बताया कि सामने की झाड़ियों के पीछे झरना है | हम भूतनाथ झरना
देखने के लिए उतावले हो गए | लेकिन मेरे मन में एक शंका भी उत्पन्न हो
रही थी कि अगर सामने झरना है तो उसकी आवाज क्यों नहीं आ रही | हमने बाइक
को रोका और जंगल में अंदर की ओर चल दिए और जल्दी ही मेरी यह शंका भी दूर
हो गई | उस्मान तो सबसे आगे भागा जा रहा था | झाड़ियों के पीछे पहुंचकर
हमने देखा कि एक लोहे के पाइप से थोड़ा-थोड़ा पानी पत्थरों पर गिर रहा था
](*,)| मेरा तो हंस-हंसकर पेट दुखने लगा=P~ मैंने बोला उस्मान जल्दी से
नहा ले भूतनाथ झरना आ गया और उस्मान की शक्ल देखने लायक थी[-( अब दिमाग
खराब हो गया मैंने बोला चलो सीधे नीलकंठ की तरफ रास्ते में नहा लेना | हम
वापिस टैक्सी स्टैंड पर आए | तब तक वहां पर एक-दो सवारी ही दिखाई दी ।
हमने जीप वाले से पूछा तो उसने बोला कि जब जीप की सवारियां पूरी हो
जाएँगी तभी चलेगा । पता नहीं कितना समय लगता जीप भरने में इसीलिए हम तीनो
एक ही बाइक पे सवार हो कर नीलकंठ की ओर चल पड़े | लगभग 12 किलोमीटर जाने
पे एक ज़ोर का झटका धीरे से लगा बाइक रिज़र्व में लग गयी:shock:

हमने सोचा कि आगे कोई पेट्रोल पंप तो जरूर मिलेगा और चलते रहे । 4
किलोमीटर आगे जाने तक हमे कोई पेट्रोल पंप नहीं मिला लेकिन हमारे मन की
एक मुराद जरूर पूरी हो गई क्योंकि रास्ते में एक बहुत ही शानदार झरना था
\\:D/| हमने बाइक साइड में लगाया | झरने के पास ही एक छोटा सा ढाबा भी था
। हमने बाइक साइड में लगाई । उस्मान सबसे पहले झरने में कूदा । उसके बाद
दीपक । मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था । आधा घंटा नहाने के बाद हमने ढाबे पे
ब्रेड-पकोड़ा और चाय ली । ढाबे वाले से पेट्रोल पंप के बारे में पूछा तो
वो बोला कि आगे कोई पेट्रोल पंप नहीं है । अब वहां से उस्मान को बाइक के
साथ वापिस भेज दिया । मैं और दीपक पीछे से आती हुई जीप में बैठ कर नीलकंठ
महादेव की ओर चल दिए ।

9 बजे के आसपास हम वहां पहुंचे । मंदिर में काफी भीड़ थी । लम्बी लाइन लगी
हुई थी और साथ ही बारिश भी शुरू हो गयी इसीलिए हमें वहां लगभग एक घंटा लग
गया । मंदिर से निकलने के बाद हम पैदल जाने वाले रास्ते से चल पड़े । लगभग
भागते हुए हम 11:30 बजे तक ऋषिकेश पहुँच गए । हमारे कमरे तक पहुँचते ही
ज़ोरदार बारिश शुरू हो गयी । जैसे ही बारिश थोड़ा धीमे हुई हमने बाइक में
पंक्चर लगवाया और हरिद्वार जाने के लिए निकल पड़े । पूरे रास्ते में जाम
लगा हुआ था । बारिश भी ज़ोरदार हो रही थी । इसीलिए ऋषिकेश से हरिद्वार
पहुँचने में हमें लगभग 2 घंटे लग गए । हम सीधे हर की पौड़ी पहुंचे और आसपास के होटलों में कमरे के लिए पूछा लेकिन उस दिन कुछ ज्यादा ही भीड़ थी इस लिए किसी भी होटल या लॉज में कमरा नहीं मिल रहा था और जो मिल रहा था वो बहुत महंगा था । फिर हमने रेलवे स्टेशन के पास एक गेस्ट
हाउस में कमरा लिया और वहां से पैदल हर की पौड़ी पे आ गए । हर की पौड़ी पे
भी काफी भीड़ थी हमने गंगा की लहरों का खूब आनंद लिया और फिर बाजार से कुछ
खरीददारी करते हुए वापिस कमरे पे आ गए । शाम को सड़क पे काफी झांकियां
निकली जा रही थी कुछ देर तक झांकियों को देखने के बाद खाना खाने के लिए
एक रेस्टोरेंट में घुस गए । फिर कमरे पे आ कर यात्रा का सारा हिसाब-किताब
किया । अगले दिन सुबह 5 बजे मैंने हरिद्वार बसस्टैंड से पानीपत की बस
पकड़ी और लगभग 10 बजे पानीपत पहुँच गया । उस्मान और दीपक बाइक से आये ।
समाप्त
देहरादून से ऋषिकेश जाते हुए शानदार सूर्यास्त

ऋषिकेश में रात का खाना

नीलकंठ महादेव के रास्ते में एक झरना

नीलकंठ महादेव के रास्ते में एक झरना

नीलकंठ महादेव के रास्ते

गंगा मैया 

नीलकंठ महादेव को अर्पित करने के लिए गंगा जल

ऋषिकेश में गंगा मैया के घाट 

पहाड़ से दिखता ऋषिकेश

लक्ष्मण झूला

हर की पौड़ी पे गंगा का तेज बहाव

हर की पौड़ी

हर की पौड़ी

झांकी

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