अब प्लान कुछ इस तरह से बना "चामुंडा देवी - काँगड़ा - ज्वालामुखी -
चिंतपूर्णी - पानीपत |
हम बसस्टॉप पर आ गए । चामुंडा देवी बसस्टॉप से पूरी धौलाधार पर्वत
श्रृंखला का मनोहारी दृश्य दिखाई दे रहा था । धीरे-धीरे धूप काफी तेज हो
गयी और हमे भूख भी लग रही थी । पास ही स्थित एक ढाबे वाले से खाने के
बारे में पूछा तो वो बोला थोड़ा समय लगेगा क्यों ढाबे पर खाना खाने वालों
कि संख्या काफी थी । उस ढाबे के सामने ही एक झोपड़ीनुमा छोटे से ढाबे से
पराठों की खुशबू आ रही थी । हमने उसी ओर रुख किया ओर थोड़ी ही देर में हम
दो-दो परांठे खाकर वापिस बसस्टॉप पर आ गए । लगभग 5 मिनट एक बस आई जोकि
काँगड़ा जा रही थी । हम भी उस में सवार हो लिए ओर ऊँचे-नीचे पहाड़ों से
होते हुए भरी दोपहर में काँगड़ा पहुँच गए । गर्मी के मारे बुरा हाल था ।
सड़क पे भयंकर जाम लगा हुआ था । काँगड़ा बसस्टैंड से बृजेश्वरी देवी मंदिर
तक पहुँचने में 1 घंटा लग गया । मंदिर में कुछ खास भीड़ नहीं थी वहां पर
दर्शन करने में हमे 5 मिनट ही लगे । मंदिर से हम वापिस बसस्टैंड पहुंचे ।
जाते ही ज्वालामुखी जाने वाली बस तैयार मिली । कांगड़ा से ज्वालामुखी का
रास्ता काफी शानदार था । 4 बजे हम ज्वालामुखी पहुँच गए
ज्वालामुखी बसस्टैंड के पास ही हमने एक होटल में कमरा लिया । दिनभर की
गर्मी से बिल्कुल परेशान हो चुके थे । इसीलिए 1 घंटे की नींद ली गयी ।
उसके बाद नहा-धोकर हम ज्वाला जी मंदिर में पहुंचे । ज्वालामुखी मंदिर माँ
सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है । ज्वालामुखी मंदिर को जोता वाली का
मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। इस स्थाल पर माता सती की जीभ गिरी थी।
इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है। ज्वालामुखी मंदिर के
समीप में ही बाबा गोरखनाथ का मंदिर है जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना
जाता है। इस मे एक पानी का एक कुंड है जो देख्नने मे खौलता हुआ लगता है
पर वास्तव मे एकदम गरम नही है। यहाँ पर काफी भीड़ थी क्योंकि जहाँ पर पानी
का कुंड है वो जगह एक तंग गुफानुमा 2-3 सीढ़ियां नीचे उतर कर है । वहां से
थोड़ा ऊपर जा कर माँ तारा देवी का मंदिर है । लगभग 2 घंटे वहां बिताने के
बाद हम वापिस होटल में आ गए । रात का खाना खाने के लिए हमने होटल के पास
ही एक भोजनालय में खाया । अगले दिन सुबह हमने ज्वालामुखी से चिंतपूर्णी
जाने वाली बस पकड़ी । लगभग 1 घंटे में हम चिंतपूर्णी पहुँच गए । मंदिर की
ओर जाने वाली सड़क पर एक भोजनालय था जहाँ पर मंदिर में चढ़ाने के लिए
प्रसाद भी मिल रहा था । हमने अपना सामान वहां रखा और वहां से प्रसाद ले
कर मंदिर की ओर चल दिए । माँ चिंतपूर्णी का मंदिर भी 51 शक्ति पीठो मे से
एक है। यहां पर माता सती के चरण गिर थे। माता के भवन के मध्य में माता की
गोल आकार की पिण्डी है। जिसके दर्शन भक्त कतारबद्ध होकर करते हैं। जब हम
मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो वहां काफी ज्यादा भीड़ थी । इतनी भीड़
में हिमांक बिल्कुल परेशान हो गया । भक्तों की लम्बी लाइन लगी हुई थी ।
बड़ी मुश्किल से गर्मी में झूझते हुए हम मंदिर में पहुंचे ।
माता के दर्शनों के बाद हम मंदिर से बाहर आये । मैंने एक दुकानदार से
पूछा कि भाई इतनी भीड़ क्यों है कोई खास दिन है क्या आज तो दुकानदार बोला
कि आज शनिवार है और हर शनिवार और रविवार को यहाँ बड़ी संख्या में लोग माता
के दर्शनों के लिए आते हैं ।
हम वापिस भोजनालय पर आये और वहां खाना खा कर बसस्टैंड पहुँच गए । वहां पर
जाकर पता चला कि चिंतपूर्णी से सीधी पानीपत की तरफ कोई बस नहीं जाती ।
टिकट खिड़की पे मौजूद एक आदमी ने बताया कि यहाँ से अम्ब चले जाओ । वहां से
पानीपत जाने वाली बस मिल जाएगी । एक बस में बैठकर हम लगभग 11:30 बजे अम्ब
पहुँच गए । वहां के बसस्टैंड से भी कोई सीधी बस नहीं है पानीपत के लिए ।
ये हमे वही पहुंचकर पता चला । भयानक गर्मी साथ में कंधे पे लटका हुआ बड़ा
सा बैग । कुल मिलाकर हालत बहुत ही ख़राब हो चले थे । हिमांक और नवीन को एक
दुकान के सामने लगे हुए बोर्ड की छाँव में खड़े कर के मैंने आसपास के
लोगों से बस के बारे में पता किया । एक भले मानस ने बताया कि 12 बजे के
आसपास पालमपुर से एक बस आएगी जो दिल्ली जाएगी । तब जाकर कुछ राहत मिली ।
मैं दूर से आती हुई हर बस को हसरत भरी निगाहों से देख रहा था लेकिन
निराशा ही हाथ लग रही थी ।:cry:
थककर मैंने दूसरे तरीके पे विचार किया कि यहाँ से अम्बाला तक की बस ढूंढ
लूँ । लेकिन जितनी भी बस वहां अम्ब के बसस्टैंड पे खड़ी थी सबके ऊपर
पंजाबी भाषा के बोर्ड लगे हुए थे । कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्या लिखा
हुआ है । एक-दो से पूछा तो बोले कि हमे नहीं पता । झल्लाहट बढ़ती जा रही
थी । :evil: तभी दूर सड़क पे एक नीले रंग कि बस चली आती दिखाई दी । आँखें
फाड़कर बस के सामने लगे हुए बोर्ड को देखा । दिल्ली-पालमपुर-दिल्ली
................:tonqe:
सड़क के लगभग बीच में खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से हाथ हिला कर बस वाले को रुकने
का इशारा किया :cop: मगर बस आगे निकल गयी एकबार तो लगा कि गयी लेकिन आगे
जाकर रुक गयी .........कंडक्टर ने खिड़की से गर्दन बाहर निकाल के पूछा
.......कहाँ जाओगे ........मैंने कहा पानीपत ..........बोला आ जाओ
:supz:..............लम्बी साँस ली और चढ़ गए बस में ......पूरी तरह
वातानुकूलित .....बोले तो ऐरकंडिशनर..... आराम से दो सीट मिल गयी
........ऐसा लगा जैसे जहन्नुम से जन्नत में आ गए हों । कुछ एक ब्रेक लेते
हुए हम शाम 7 बजे के आसपास पानीपत पहुँच गए ।
यात्रा में हुआ खर्चा इस तरह से था । खानपान का खर्च याद नहीं
जगह साधन किराया या खर्चा / प्रतिवयक्ति
पानीपत से पठानकोट रेल (उत्तर संपर्क क्रांति) 260/-
पठानकोट से गग्गल बस 85/-
गग्गल से धर्मशाला बस 10/-
होटल रूम 500/-
धर्मशाला से मैक्लोडगंज जीप 15/-
मैक्लोडगंज भ्रमण ऑटोरिक्शा 500/-
मैक्लोडगंज से धर्मशाला जीप 15/-
धर्मशाला से चामुंडा देवी बस 15/-
चामुंडा देवी से काँगड़ा बसस्टैंड बस 20/-
काँगड़ा बसस्टैंड से बृजेश्वरी देवी मंदिर ऑटोरिक्शा 10/-
बृजेश्वरी देवी मंदिर से काँगड़ा बसस्टैंड ऑटोरिक्शा 10/-
काँगड़ा बसस्टैंड से ज्वालामुखी बस 40/-
होटल रूम 400/-
ज्वालामुखी से चिंतपूर्णी बस 35/-
चिंतपूर्णी से अम्ब बस 25/-
अम्ब से पानीपत बस 500/-
कुछ अन्य बातें जोकि मुझे ठीक लगी वो ये कि पूरे भ्रमण के दौरान यातायात
की कोई समस्या नहीं आई क्यों लगभग 5 या 10 मिनट के अंतराल पर बसें आ-जा
रही थी । अगर आप काँगड़ा घाटी जा रहे हो तो स्थानीय बस सेवा की कमी नहीं
है । अगर मंदिरों के दर्शन के लिए जाना है तो त्योहारों के इलावा शनिवार
और रविवार से बच के रहना क्योंकि इन दो दिनों में काफी भीड़ हो जाती है
मंदिरों में ।
चिंतपूर्णी - पानीपत |
हम बसस्टॉप पर आ गए । चामुंडा देवी बसस्टॉप से पूरी धौलाधार पर्वत
श्रृंखला का मनोहारी दृश्य दिखाई दे रहा था । धीरे-धीरे धूप काफी तेज हो
गयी और हमे भूख भी लग रही थी । पास ही स्थित एक ढाबे वाले से खाने के
बारे में पूछा तो वो बोला थोड़ा समय लगेगा क्यों ढाबे पर खाना खाने वालों
कि संख्या काफी थी । उस ढाबे के सामने ही एक झोपड़ीनुमा छोटे से ढाबे से
पराठों की खुशबू आ रही थी । हमने उसी ओर रुख किया ओर थोड़ी ही देर में हम
दो-दो परांठे खाकर वापिस बसस्टॉप पर आ गए । लगभग 5 मिनट एक बस आई जोकि
काँगड़ा जा रही थी । हम भी उस में सवार हो लिए ओर ऊँचे-नीचे पहाड़ों से
होते हुए भरी दोपहर में काँगड़ा पहुँच गए । गर्मी के मारे बुरा हाल था ।
सड़क पे भयंकर जाम लगा हुआ था । काँगड़ा बसस्टैंड से बृजेश्वरी देवी मंदिर
तक पहुँचने में 1 घंटा लग गया । मंदिर में कुछ खास भीड़ नहीं थी वहां पर
दर्शन करने में हमे 5 मिनट ही लगे । मंदिर से हम वापिस बसस्टैंड पहुंचे ।
जाते ही ज्वालामुखी जाने वाली बस तैयार मिली । कांगड़ा से ज्वालामुखी का
रास्ता काफी शानदार था । 4 बजे हम ज्वालामुखी पहुँच गए
ज्वालामुखी बसस्टैंड के पास ही हमने एक होटल में कमरा लिया । दिनभर की
गर्मी से बिल्कुल परेशान हो चुके थे । इसीलिए 1 घंटे की नींद ली गयी ।
उसके बाद नहा-धोकर हम ज्वाला जी मंदिर में पहुंचे । ज्वालामुखी मंदिर माँ
सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है । ज्वालामुखी मंदिर को जोता वाली का
मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। इस स्थाल पर माता सती की जीभ गिरी थी।
इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है। ज्वालामुखी मंदिर के
समीप में ही बाबा गोरखनाथ का मंदिर है जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना
जाता है। इस मे एक पानी का एक कुंड है जो देख्नने मे खौलता हुआ लगता है
पर वास्तव मे एकदम गरम नही है। यहाँ पर काफी भीड़ थी क्योंकि जहाँ पर पानी
का कुंड है वो जगह एक तंग गुफानुमा 2-3 सीढ़ियां नीचे उतर कर है । वहां से
थोड़ा ऊपर जा कर माँ तारा देवी का मंदिर है । लगभग 2 घंटे वहां बिताने के
बाद हम वापिस होटल में आ गए । रात का खाना खाने के लिए हमने होटल के पास
ही एक भोजनालय में खाया । अगले दिन सुबह हमने ज्वालामुखी से चिंतपूर्णी
जाने वाली बस पकड़ी । लगभग 1 घंटे में हम चिंतपूर्णी पहुँच गए । मंदिर की
ओर जाने वाली सड़क पर एक भोजनालय था जहाँ पर मंदिर में चढ़ाने के लिए
प्रसाद भी मिल रहा था । हमने अपना सामान वहां रखा और वहां से प्रसाद ले
कर मंदिर की ओर चल दिए । माँ चिंतपूर्णी का मंदिर भी 51 शक्ति पीठो मे से
एक है। यहां पर माता सती के चरण गिर थे। माता के भवन के मध्य में माता की
गोल आकार की पिण्डी है। जिसके दर्शन भक्त कतारबद्ध होकर करते हैं। जब हम
मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो वहां काफी ज्यादा भीड़ थी । इतनी भीड़
में हिमांक बिल्कुल परेशान हो गया । भक्तों की लम्बी लाइन लगी हुई थी ।
बड़ी मुश्किल से गर्मी में झूझते हुए हम मंदिर में पहुंचे ।
माता के दर्शनों के बाद हम मंदिर से बाहर आये । मैंने एक दुकानदार से
पूछा कि भाई इतनी भीड़ क्यों है कोई खास दिन है क्या आज तो दुकानदार बोला
कि आज शनिवार है और हर शनिवार और रविवार को यहाँ बड़ी संख्या में लोग माता
के दर्शनों के लिए आते हैं ।
हम वापिस भोजनालय पर आये और वहां खाना खा कर बसस्टैंड पहुँच गए । वहां पर
जाकर पता चला कि चिंतपूर्णी से सीधी पानीपत की तरफ कोई बस नहीं जाती ।
टिकट खिड़की पे मौजूद एक आदमी ने बताया कि यहाँ से अम्ब चले जाओ । वहां से
पानीपत जाने वाली बस मिल जाएगी । एक बस में बैठकर हम लगभग 11:30 बजे अम्ब
पहुँच गए । वहां के बसस्टैंड से भी कोई सीधी बस नहीं है पानीपत के लिए ।
ये हमे वही पहुंचकर पता चला । भयानक गर्मी साथ में कंधे पे लटका हुआ बड़ा
सा बैग । कुल मिलाकर हालत बहुत ही ख़राब हो चले थे । हिमांक और नवीन को एक
दुकान के सामने लगे हुए बोर्ड की छाँव में खड़े कर के मैंने आसपास के
लोगों से बस के बारे में पता किया । एक भले मानस ने बताया कि 12 बजे के
आसपास पालमपुर से एक बस आएगी जो दिल्ली जाएगी । तब जाकर कुछ राहत मिली ।
मैं दूर से आती हुई हर बस को हसरत भरी निगाहों से देख रहा था लेकिन
निराशा ही हाथ लग रही थी ।:cry:
थककर मैंने दूसरे तरीके पे विचार किया कि यहाँ से अम्बाला तक की बस ढूंढ
लूँ । लेकिन जितनी भी बस वहां अम्ब के बसस्टैंड पे खड़ी थी सबके ऊपर
पंजाबी भाषा के बोर्ड लगे हुए थे । कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्या लिखा
हुआ है । एक-दो से पूछा तो बोले कि हमे नहीं पता । झल्लाहट बढ़ती जा रही
थी । :evil: तभी दूर सड़क पे एक नीले रंग कि बस चली आती दिखाई दी । आँखें
फाड़कर बस के सामने लगे हुए बोर्ड को देखा । दिल्ली-पालमपुर-दिल्ली
................:tonqe:
सड़क के लगभग बीच में खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से हाथ हिला कर बस वाले को रुकने
का इशारा किया :cop: मगर बस आगे निकल गयी एकबार तो लगा कि गयी लेकिन आगे
जाकर रुक गयी .........कंडक्टर ने खिड़की से गर्दन बाहर निकाल के पूछा
.......कहाँ जाओगे ........मैंने कहा पानीपत ..........बोला आ जाओ
:supz:..............लम्बी साँस ली और चढ़ गए बस में ......पूरी तरह
वातानुकूलित .....बोले तो ऐरकंडिशनर..... आराम से दो सीट मिल गयी
........ऐसा लगा जैसे जहन्नुम से जन्नत में आ गए हों । कुछ एक ब्रेक लेते
हुए हम शाम 7 बजे के आसपास पानीपत पहुँच गए ।
यात्रा में हुआ खर्चा इस तरह से था । खानपान का खर्च याद नहीं
जगह साधन किराया या खर्चा / प्रतिवयक्ति
पानीपत से पठानकोट रेल (उत्तर संपर्क क्रांति) 260/-
पठानकोट से गग्गल बस 85/-
गग्गल से धर्मशाला बस 10/-
होटल रूम 500/-
धर्मशाला से मैक्लोडगंज जीप 15/-
मैक्लोडगंज भ्रमण ऑटोरिक्शा 500/-
मैक्लोडगंज से धर्मशाला जीप 15/-
धर्मशाला से चामुंडा देवी बस 15/-
चामुंडा देवी से काँगड़ा बसस्टैंड बस 20/-
काँगड़ा बसस्टैंड से बृजेश्वरी देवी मंदिर ऑटोरिक्शा 10/-
बृजेश्वरी देवी मंदिर से काँगड़ा बसस्टैंड ऑटोरिक्शा 10/-
काँगड़ा बसस्टैंड से ज्वालामुखी बस 40/-
होटल रूम 400/-
ज्वालामुखी से चिंतपूर्णी बस 35/-
चिंतपूर्णी से अम्ब बस 25/-
अम्ब से पानीपत बस 500/-
कुछ अन्य बातें जोकि मुझे ठीक लगी वो ये कि पूरे भ्रमण के दौरान यातायात
की कोई समस्या नहीं आई क्यों लगभग 5 या 10 मिनट के अंतराल पर बसें आ-जा
रही थी । अगर आप काँगड़ा घाटी जा रहे हो तो स्थानीय बस सेवा की कमी नहीं
है । अगर मंदिरों के दर्शन के लिए जाना है तो त्योहारों के इलावा शनिवार
और रविवार से बच के रहना क्योंकि इन दो दिनों में काफी भीड़ हो जाती है
मंदिरों में ।
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| चामुंडा देवी मंदिर के पास |
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| चामुंडा देवी मंदिर के पास |
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| चामुंडा देवी मंदिर के पास |
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| चामुंडा देवी मंदिर के पास |
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| ज्वालाजी मंदिर में |
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| ज्वालाजी मंदिर में |
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| ज्वालाजी मंदिर में |
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| घर वापसी |








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