रविवार, 17 दिसंबर 2017

वैष्णो माता का बर्फीला दरबार

इस यात्रा से पहले भी कई बार मैं अपने मित्र अमित सांगवान के साथ वैष्णो देवी की यात्रा कर चुका हूँ । कभी अमित चलने की पहल करता और कभी मैं । तो इस बार हमारा जनवरी के महीने में वैष्णो देवी जाने का प्लान बना । अमित ने यात्रा से कुछ दिन पहले ऑनलाइन ही 26 जनवरी 2012 की उत्तर संपर्क क्रांति की स्लीपर क्लास की टिकट पानीपत से जम्मू की बुक कर दी जोकि वेटिंग थी और यात्रा की तिथि तक वेटिंग ही रही । ट्रेन का दिल्ली से पानीपत पहुंचने का समय शाम 10 :10 बजे का था । 26 जनवरी को हम ट्रेन के आने से कुछ पहले पानीपत रेलवे स्टेशन पहुँच गए । टिकट के कन्फर्म न होने के कारण मन में कुछ डर भी था । अमित ने कहा कि जो होगा देखा जायेगा । निर्धारित समय पर ट्रेन पानीपत पहुंची | स्टेशन पर ट्रेन के जनरल डिब्बे के रुकने के अनुमानित स्थान पर जम्मू की ओर जाने वाले यात्रियों की काफी भीड़ थी इसीलिए हमे जिस डिब्बे में वेटिंग मिली हुई थी हम उसी में चढ़ लिए । यात्री लगभग सो रहे थे । हम भी हमारी वेटिंग सीट पर बैठे हुए यात्री से अनुरोध कर के वहां बैठ गए । अम्बाला पहुँचने से कुछ पहले टी.टी. आया और हमारी बात सुन कर बोला कि आप लोगों को फाइन देना पड़ेगा । अमित कुछ जुगाड़ करने के लिए उसके साथ-साथ दूसरे डिब्बे में गया और लेकिन टी.टी. बाबू तो मान ही नहीं रहे थे । अम्बाला पहुँचने पर हमारी वेटिंग वाली सीट में से एक सीट खाली हो गयी । जोकि जम्मू तक खाली ही रही । टी.टी. ने जुर्माना लगा के हमे पर्ची थमा दी और रिजर्वेशन चार्ट देख कर वो खाली सीट हमे दे दी । इस तरह थोड़ी सी परेशानी के बाद हम सुबह लगभग 7:30 बजे के आसपास जम्मू पहुँच गए । स्टेशन के बाहर ही कटरा जाने के लिए सरकारी और प्राइवेट बस खड़ी हुई थी । प्राइवेट बस पहले जा रही थी इसीलिए हम भी उसी में सवार हो लिए । जम्मू के ट्रैफिक को पार कर के बस कटरा की ओर बढ़ चली । रास्ते में एक ढाबे पार खानपान के लिए बस रुकी । आधा घंटा रुकने के बाद बस आगे चल दी । कटरा से कुछ पहले एक चेक पोस्ट पार चेकिंग के लिए दुबारा बस से उतरना पड़ा । चेकपोस्ट से सुदूर बर्फ से ढके हुए पहाड़ दिखाई दे रहे थे | लगभग 9:30 बजे हम कटरा पहुँच गए । हम दोनों के पास एक-एक पिठू बैग था और उसमे एक-एक जोड़ी कपडे थे । इसीलिए हमने किसी होटल में कमरा लेना ठीक नहीं समझा और कटरा पहुँच कर हम सीधे बसस्टैंड के पास बने हुए शुलभ शौचालय पहुंचे । वहां पर नित्यकर्म निपटा कर हमने यात्रा पर्ची काउंटर से यात्रा के लिए जरूरी यात्रा पर्ची ली और ऑटो में बैठकर बाणगंगा पहुँच गए । यात्रा पर्ची की वैधता जारी होने के 6 घंटे बाद तक की होती है यानि कि पर्ची जारी होने के 6 घंटे के अंदर यात्रा पर्ची को बाणगंगा चेकपोस्ट पर स्कैन करवा लेना होता है | बाणगंगा से ऊपर पहाड़ों की ओर देखने पार बर्फ ही बर्फ दिखाई दी । हम ये देख कर खुश हो गए और चेकपोस्ट से निकलने के बाद तेज क़दमों से माता के भवन की ओर चल दिए । अमित तो पहले भी कश्मीर में बर्फ में घूम के आ चुका था लेकिन वैष्णो देवी की पहाड़ियों पार ज़िंदगी में पहली बार देखी तो हम दोनों रोमांचित हो उठे ।
जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर जा रहे थे हवा में ठंडक बढ़ती जा रही थी । अर्धकुंवारी से थोड़ा पहले हम नए रास्ते से माता के भवन की ओर मुड़ गए । नए रास्ते पर घोड़े-खच्चर नहीं चलते इसीलिए वो बिल्कुल साफ़ और भीड़ रहित रास्ता है साथ ही नए रास्ते पे ज्यादा चढाई भी नहीं है । अभी तक हम सोच रहे थे कि बर्फ आसपास की ऊँची पहाड़ियों पर पड़ी है लेकिन हिमकोटी से आगे निकलते ही हमे रास्ते में थोड़ी थोड़ी बर्फ मिली । इतने से ही हम खुश हो उठे । मैंने बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों को हाथ में उठा के देखा तो बिल्कुल चीनी जैसी लग रही थी ।
अब तो हमारी चलने की गति दोगुनी हो गयी । जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए वैसे ही बर्फ भी ज्यादा मिलने लगी । जहाँ से माता को अर्पित करने के लिए प्रसाद मिलता है वहां पर बर्फ थी । भवन के पास बर्फीले पानी में स्नान करने के बाद हमने अपना सामान लॉकर में जमा करवाया और माता के दर्शनों के लिए चल दिए । भीड़ बिल्कुल भी नहीं थी और हमने खूब इत्मीनान से दर्शन किये । माता के दर्शनों के बाद हम भैरों मंदिर की ओर चले । भैरों मंदिर के रास्ते में काफी बर्फ पड़ी हुई थी । बर्फ को हटा कर आने-जाने के लिए रास्ता बना रखा था  । अगर किसी को सामने से आते हुए रास्ता देना हो तो बर्फ पर चढ़ना पड़ता । इसी चक्कर में एक-दो बार हम फिसल भी गए । बर्फ देखकर हम पागल हुए जा रहे थे । लगातार फोटो सेसन चलता रहा और इसी वजह से हम लगभग 2 घंटे में भैरों मंदिर पहुंचे । भैरों मंदिर में दर्शन के बाद एक बार फिर फोटो सेसन हुआ ।
भैरों मंदिर से हम सांझी छत पहुंचे । अब तक बिल्कुल अँधेरा हो चुका था । धीरे-धीरे चलते हुए हम अर्धकुंवारी जा के रुके । वहां पे काफी भीड़ थी जोकि हमेशा रहती है । अर्धकुंवारी से लगभग 2 किलोमीटर नीचे उतरने पर एक लम्बी सीढ़ियों वाला रास्ता आता है जोकि चरण पादुका मंदिर के पास निकलता है । हम उसी रास्ते से नीचे उतरे । हालाँकि वो काफी कठिन सीढ़ियां हैं लेकिन सीढ़ियों के दोनों ओर दुकाने हैं इसीलिए कठिनाई का ज्यादा पता नहीं चलता ।
कटरा पहुँच कर हमने बसस्टैंड के पास होटल महिंद्रा में एक रूम लिया । रूम पर फ्रेश होकर हमने बसस्टैंड के पास एक भोजनालय में खाना खाया और वापिस आ कर सो गए । अगले दिन  सुबह 6 बजे हमने कटरा से जम्मू की बस पकड़ी और लगभग 8 बजे जम्मू रेलवे स्टेशन पहुँच गए । वहां से मालवा एक्प्रेस की टिकट ली जोकि प्लेटफार्म पर खड़ी हुई थी । किस्मत से हमे जनरल डिब्बे में सीट मिल गयी और शाम 5 बजे के आसपास ट्रेन ने पानीपत पहुंचा दिया .........इस तरह हमारी वैष्णो माता के बर्फीले दरबार की यात्रा का समापन हुआ
ठण्ड का प्रकोप

अमित

मैं

वैष्णो माता की पहाड़ियों पे बर्फ

वैष्णो माता की पहाड़ियों पे बर्फ

वैष्णो माता की पहाड़ियों पे बर्फ

वैष्णो माता की पहाड़ियों पे बर्फ




बर्फ ही बर्फ 


बर्फ ही बर्फ 

बर्फ ही बर्फ 


ऊपर भी बर्फ

ऊपर भी बर्फ
























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मोनल

मोनल


4 टिप्‍पणियां:

  1. पहली बार बर्फ देखने व छूने का रोमांच अलग ही होता है।

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    1. बिल्कुल संदीप जी और बर्फ अगर वैष्णो माता के दरबार में मिले तो नज़ारा भी दुर्लभ होता है

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